भारत सरकार ने रत्न और आभूषण क्षेत्र में बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए सोना, चांदी और प्लैटिनम से बने आभूषणों के आयात पर सख्त नियंत्रण लगा दिया है। अब इनकी आयात नीति ‘फ्री’ से बदलकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कर दी गई है, जिससे बिना अनुमति विदेश से ज्वेलरी लाना संभव नहीं होगा। इस फैसले का असर सीधे बाजार, व्यापारियों और कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
आयात नीति में बड़ा बदलाव
सरकार द्वारा जारी नए निर्देश के अनुसार अब सोने, चांदी और प्लैटिनम के आभूषणों का आयात बिना विशेष अनुमति के नहीं किया जा सकेगा। पहले ये वस्तुएं ‘मुक्त’ श्रेणी में आती थीं, लेकिन अब इन्हें ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया गया है। इसका मतलब है कि हर आयात के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
सोना-चांदी के ताजा भाव
2 अप्रैल को बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट और हलचल दोनों देखने को मिली।
24 कैरेट सोना करीब 150,470 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जिसमें गिरावट दर्ज की गई।
चांदी की कीमत में 100 रुपये प्रति किलो की बढ़त के साथ यह 1,05,100 रुपये प्रति किलो रही।
हालांकि पिछले सत्र की तुलना में सोने में करीब 2.6% और चांदी में 5% तक गिरावट देखी गई है।
क्या होगा नए नियम का असर?
इस फैसले का सीधा असर आयातकों और ज्वेलरी कारोबारियों पर पड़ेगा। अब बिना सरकारी अनुमति कोई भी विदेशी ज्वेलरी भारत में नहीं ला सकेगा। यहां तक कि पहले से किए गए ऑर्डर या एडवांस पेमेंट भी इस नियम से बाहर नहीं होंगे। इससे बाजार में सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
क्यों लिया गया ये फैसला?
सरकार का मानना है कि कुछ आयातक मुक्त व्यापार समझौतों का गलत फायदा उठा रहे थे। खासकर थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों से कम शुल्क पर बड़ी मात्रा में ज्वेलरी आयात की जा रही थी, जिससे घरेलू उद्योग को नुकसान हो रहा था और राजस्व में भी कमी आ रही थी।
किन्हें मिली राहत?
इस सख्ती के बीच सरकार ने निर्यात आधारित इकाइयों को राहत दी है।
100% निर्यात उन्मुख इकाइयां (EOUs)
विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की कंपनियां
इन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। साथ ही, निर्यात योजनाओं के तहत होने वाले आयात को भी छूट दी गई है।
बाजार और उद्योग की प्रतिक्रिया
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से शुरुआत में कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन लंबे समय में यह घरेलू ज्वेलरी उद्योग के लिए फायदेमंद साबित होगा। उद्योग से जुड़े लोगों ने सरकार से लाइसेंस प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग की है।