India Rice Export Prices : एशिया के चावल बाजार में इस हफ्ते कीमतों में तेजी देखने को मिली है। भारत में चावल का निर्यात मूल्य एक साल से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि वियतनाम में कीमतें करीब दो महीने के शिखर पर पहुंच गईं। रुपये की मजबूती और घरेलू बाजार में सीमित आपूर्ति ने भारतीय चावल के भाव को सहारा दिया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ने की उम्मीद ने भी कीमतों को मजबूती दी है। इस बदलाव का असर उन देशों पर पड़ सकता है जो अपनी जरूरतों के लिए चावल के आयात पर निर्भर हैं।
भारत में क्यों बढ़े भाव
भारतीय बाजार में 5 फीसदी टूटे हुए पारबॉइल्ड चावल का निर्यात मूल्य बढ़कर 384 से 389 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि पिछले सप्ताह यह 378 से 384 डॉलर प्रति टन था। वहीं, 5 फीसदी टूटे हुए सफेद चावल की कीमत 385 से 390 डॉलर प्रति टन दर्ज की गई। निर्यातकों के मुताबिक, घरेलू बाजार में सीमित आपूर्ति के कारण धान की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। सामान्य से कम बारिश के चलते कुछ राज्यों में उत्पादन प्रभावित होने की चिंता भी बनी हुई है। इन परिस्थितियों के कारण भारतीय चावल के निर्यात भाव में बढ़ोतरी हुई है।
बांग्लादेश में बढ़ा महंगाई का दबाव
चावल की बढ़ती कीमतों का असर बांग्लादेश में भी दिखाई देने लगा है। पिछले सप्ताह वहां अच्छी किस्म के चावल की कीमत 72 टका प्रति किलो से बढ़कर 74 से 75 टका प्रति किलो तक पहुंच गई। ईंधन की बढ़ती लागत और धान के महंगे होने को इस तेजी की प्रमुख वजह बताया जा रहा है। पहले से ही महंगाई और जीवन-यापन के बढ़ते खर्च से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति मुश्किलें बढ़ा सकती है। चावल वहां आम लोगों के भोजन का अहम हिस्सा है, इसलिए इसकी कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी घरेलू बजट पर असर डालती है।
ये भी पढ़ें : Saudi Arabia जाने वालों की बढ़ी मुश्किलें, तीन एयरलाइंस ने बदली उड़ानों की तारीख
वियतनाम को मांग बढ़ने की उम्मीद
वियतनाम में 5 फीसदी टूटे हुए चावल का भाव बढ़कर 440 से 450 डॉलर प्रति टन हो गया, जो 21 अगस्त के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पिछले सप्ताह यही भाव 420 से 430 डॉलर प्रति टन था। व्यापारियों के अनुसार, फिलीपींस नवंबर से वियतनाम से चावल की खरीद फिर शुरू कर सकता है। इस संभावना ने बाजार में उत्साह बढ़ाया है। वियतनाम के कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी उम्मीद जताई कि साल के बाकी महीनों में निर्यात में तेजी आएगी और देश 80 लाख टन चावल निर्यात करने का लक्ष्य हासिल कर लेगा।
थाईलैंड के सामने बढ़ी चुनौती
थाईलैंड में भी चावल की कीमतें बढ़कर 480 डॉलर प्रति टन पहुंच गईं, जो 10 सितंबर के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले सप्ताह भाव 465 से 468 डॉलर प्रति टन था। व्यापारियों के मुताबिक, जहाजों की आवाजाही, निर्यातकों की अतिरिक्त खरीदारी और बाढ़ के कारण लोडिंग में देरी से कीमतों पर दबाव बढ़ा है। थाईलैंड का इस साल 70 लाख टन चावल निर्यात करने का लक्ष्य भी चुनौती में है। भारत और पाकिस्तान से प्रतिस्पर्धा के साथ प्रमुख खरीदारों की कमजोर मांग इसके पीछे अहम कारण बताई जा रही है।