India-Russia Aerospace Deal : भारत और रूस के बीच सहयोग अब पारंपरिक रक्षा क्षेत्र से आगे बढ़कर नागरिक विमानन तक पहुंचता दिख रहा है। रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन के सीईओ वादिम बाडेखा के मुताबिक, पिछले छह महीनों में भारतीय कंपनियों के साथ बातचीत में काफी प्रगति हुई है। नई दिल्ली में चल रही इन्नोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी के दौरान कई समझौतों के औपचारिक रूप लेने की संभावना है। इनमें क्षेत्रीय यात्री विमान IL-114-300 को लेकर प्रस्ताव खास चर्चा में हैं।
IL-114-300 पर बड़े सौदों की तैयारी
रूसी कंपनियां भारतीय एयरलाइंस और विमान संचालकों को IL-114-300 उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। प्रस्तावित सौदों में पिनेकल एयर के लिए 50 विमान, एयर केरल के लिए 20 विमान और स्लीक एविएशन से जुड़े समझौते के तहत 35 विमान शामिल बताए गए हैं। यदि ये प्रस्ताव आगे बढ़ते हैं तो भारतीय क्षेत्रीय विमानन बाजार में रूसी विमान की मौजूदगी बढ़ सकती है। खासकर छोटे और मध्यम दूरी के मार्गों पर इन विमानों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
छोटे शहरों के लिए अहम विमान
IL-114-300 टर्बोप्रॉप क्षेत्रीय यात्री विमान है, जिसे छोटे और मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए विकसित किया गया है। भारत में ऐसे विमान उन मार्गों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जहां यात्रियों की संख्या बड़े जेट विमानों के संचालन के लिए पर्याप्त नहीं होती। कम यात्री क्षमता वाले मार्गों पर टर्बोप्रॉप विमान अपेक्षाकृत कम ईंधन और संचालन लागत के कारण व्यावहारिक विकल्प बन सकते हैं। जनवरी में हैदराबाद में यूएसी ने फ्लेमिंगो एयरोस्पेस के साथ छह विमानों की संभावित आपूर्ति को लेकर प्रारंभिक समझौता भी किया था।
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SJ-100 के स्थानीय उत्पादन पर जोर
रूस और भारत के बीच बातचीत सिर्फ विमान बिक्री तक सीमित नहीं है। SJ-100 क्षेत्रीय जेट के भारत में स्थानीय उत्पादन को लेकर भी चर्चा काफी आगे बढ़ने की बात कही गई है। यूएसी के अनुसार इस विषय पर बातचीत करीब 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। इससे पहले यूएसी और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने SJ-100 के संयुक्त लाइसेंस प्राप्त उत्पादन से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। भारत में निर्माण होने से तकनीक हस्तांतरण और स्थानीय औद्योगिक क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है।
साझेदारी में चुनौतियां भी कम नहीं
भारत-रूस नागरिक विमानन सहयोग की संभावनाएं मजबूत दिख रही हैं, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं। किसी नए विमान के भारतीय बाजार में आने के लिए सुरक्षा और प्रमाणन से जुड़ी नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसके अलावा स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव और बिक्री के बाद की सेवाओं का मजबूत नेटवर्क जरूरी होगा। कीमत, ईंधन दक्षता, यात्री सुविधा और वित्तीय व्यवस्था भी एयरलाइंस के फैसले को प्रभावित कर सकती है। यदि IL-114-300 के प्रस्तावित सौदे और SJ-100 का स्थानीय उत्पादन आगे बढ़ते हैं, तो भारत-रूस संबंधों में नागरिक एयरोस्पेस सहयोग का नया अध्याय खुल सकता है।