भारत और रूस के बीच व्यापारिक रिश्तों में ठंडक साफ नजर आ रही है। ताजा ट्रेड डेटा के मुताबिक जनवरी 2026 में रूस से भारत का आयात 40.48 प्रतिशत गिर गया। एक साल पहले जहां यह आंकड़ा 4.81 बिलियन डॉलर था, वहीं अब घटकर 2.86 बिलियन डॉलर रह गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी दबाव, टैरिफ में बदलाव और ऊर्जा सप्लाई के नए समीकरण इसके प्रमुख कारण हैं।
क्रूड ऑयल से शुरू हुई गिरावट
भारत के रूस से कुल आयात में करीब 80 प्रतिशत हिस्सा क्रूड ऑयल का रहा है। 2023 से 2025 के बीच भारत ने रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदा, जिससे कुल क्रूड इम्पोर्ट में रूस की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। अप्रैल 2025 में भारत ने रूस से 4.73 बिलियन डॉलर का तेल खरीदा था, लेकिन जनवरी 2026 में यह घटकर करीब 2.3 बिलियन डॉलर रह गया। कोयला, उर्वरक और अन्य सामान इस गिरावट की भरपाई नहीं कर पा रहे हैं।
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अमेरिका के साथ नई डील का असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के साथ हुए नए व्यापार समझौते ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। पहले लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया। साथ ही रूस से तेल खरीद पर लगाई गई 25 प्रतिशत पेनाल्टी भी हटा दी गई। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ऐलान के बाद भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा और तकनीक आयात बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने आपसी व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
वेनेजुएला की ओर झुकाव
भारत की बड़ी रिफाइनिंग कंपनी Reliance Industries Limited ने जनवरी में रूस से शून्य क्रूड डिलीवरी की संभावना जताई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ा सकता है। 2012-13 में भारत वेनेजुएला का बड़ा खरीदार था और अब बदलते भू-राजनीतिक हालात में यह रुझान फिर तेज हो सकता है। इससे रूस से आयात में और गिरावट आने की संभावना है