अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका आरोप है कि भारत रूस से रियायती दर पर तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को लम्बा खींच रहा है। नवारो ने कहा कि भारत व्यापार और ऊर्जा के मोर्चे पर दोहरा खेल खेल रहा है, जिससे वैश्विक स्थिरता को खतरा है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यह स्थिति अमेरिकी करदाताओं पर बोझ डाल रही है और इसे "मोदी का युद्ध" करार दिया।
रूस से सस्ते तेल की खरीद पर सवाल
नवारो ने चेतावनी दी कि रूस से भारत की लगातार तेल खरीद से यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है कि रूस इस तेल से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल अपनी सैन्य मशीनरी को और मजबूत करने में कर रहा है, जिससे अधिक यूक्रेनी मारे जा रहे हैं। इस परिस्थिति में पश्चिमी देशों पर वित्तीय दबाव बढ़ता है।
दोहरे खेल का आरोप
नवारो ने भारत पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, भारत एक ओर लोकतंत्र और वैश्विक साझेदारी की बात करता है, लेकिन दूसरी ओर रूस और चीन के साथ आर्थिक रिश्ते मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व के सामने खुद को मुक्त व्यापार समर्थक दिखाता है, जबकि असल में ऊंचे टैरिफ लगाकर लाभ उठाता है।
वैश्विक स्थिरता पर असर
नवारो का मानना है कि भारत के ये कदम अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के फैसले केवल रूस-यूक्रेन युद्ध को लंबा ही नहीं खींचते बल्कि अमेरिका और यूरोप को भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलने पर मजबूर करते हैं। उनका कहना है कि अमेरिकी करदाता इस युद्ध का खर्च उठा रहे हैं, जबकि भारत इससे आर्थिक लाभ ले रहा है।
भारत पर बढ़ सकता है दबाव
नवारो की टिप्पणियों ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में भारत पर पश्चिमी देशों का दबाव और बढ़ सकता है। खासकर ऊर्जा और व्यापार से जुड़े मामलों में भारत को कड़ी आलोचना झेलनी पड़ सकती है। यह बयान उस समय आया है जब भारत रूस से कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है।