पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने एक अहम मानवीय कदम उठाते हुए ईरान के युद्धपोत IRIS Lavan को कोच्चि बंदरगाह में शरण दी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खुलासा किया कि तकनीकी खराबी और संभावित सुरक्षा खतरे के बीच ईरान ने भारत से मदद मांगी थी। भारत ने स्थिति को मानवीय दृष्टिकोण से देखते हुए जहाज को भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दी, जिससे उस पर सवार कैडेट्स की जान सुरक्षित बच सकी।
ईरान की मदद के लिए आगे आया भारत
पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसी बीच ईरान के युद्धपोतों को भी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि ईरान की ओर से भारत को संदेश मिला था कि उनका एक जहाज तकनीकी समस्या से जूझ रहा है और वह भारतीय बंदरगाह में शरण चाहता है।
भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को जहाज को भारतीय बंदरगाह में आने की अनुमति दे दी। इसके बाद यह जहाज कोच्चि पोर्ट पहुंचा, जहां फिलहाल सुरक्षित रूप से खड़ा है।
अमेरिकी सबमरीन के खतरे के बीच बचा IRIS Lavan
क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के दौरान अमेरिकी सबमरीन द्वारा ईरानी युद्धपोतों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया था। श्रीलंका के तट के पास ईरानी वॉरशिप IRIS Dena के डूबने की खबर ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी।
ऐसे हालात में भारतीय बंदरगाह में शरण मिलने से IRIS Lavan संभावित हमले से बच गया। इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा और मानवीय दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जहाज पर सवार कैडेट्स को सुरक्षित उतारा गया
विदेश मंत्री ने बताया कि जहाज पर कई युवा कैडेट सवार थे, जिन्हें सुरक्षित तरीके से उतारकर पास के सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। इन कैडेट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी भारत के फैसले का एक महत्वपूर्ण कारण था।
उन्होंने बताया कि ये जहाज पहले एक फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के लिए क्षेत्र में आए थे, लेकिन अचानक बदले हालात के कारण वे मुश्किल स्थिति में फंस गए। एक अन्य जहाज श्रीलंका के त्रिंकोमाली पोर्ट पहुंच गया, जबकि एक जहाज रास्ते में डूब गया।
खाड़ी क्षेत्र में भारतीयों की सुरक्षा बड़ी चिंता
जयशंकर ने यह भी बताया कि खाड़ी क्षेत्र में करीब 90 लाख से एक करोड़ भारतीय रहते हैं। इसलिए वहां की स्थिरता और समुद्री सुरक्षा भारत के लिए बेहद अहम है।
हाल के दिनों में कई तेल टैंकरों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनमें दो भारतीय नागरिकों की मौत की खबर है। ऐसे में समुद्री व्यापार और मर्चेंट मरीन में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा की जरूरत बताई जा रही है।
समुद्री सुरक्षा के लिए भारत की रणनीति
विदेश मंत्री के अनुसार, पिछले दो वर्षों से जब हूती विद्रोहियों द्वारा जहाजों पर हमले किए जा रहे थे, तब भारत ने उत्तरी अरब सागर में अपनी नौसेना की तैनाती बढ़ा दी थी।
भारत का यह कदम न केवल क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी अहम माना जा रहा है।