बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा दी गई है। कोर्ट ने सोमवार को देशव्यापी छात्र विद्रोह पर हिंसक कार्रवाई में कथित भूमिका के लिए शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को मौत की सजा सुनाई है। अब बांग्लादेश की जिद है कि भारत तुरंत शेख हसीना को सौंप दे। इसके साथ पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी वापस भेजने को अनुरोध किया है। इसके पीछे द्र्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि का हवाला दिया है।
यह मांग बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) की ओर से बीते साल देशव्यापी छात्र विद्रोह पर हिंसक कार्रवाई में कथित भूमिका को लेकर शेख हसीन और कमाल को मौत की सजा सुनाए जाने के कुछ बाद आई है.
नरसंहार के लिए मानवता के खिलाफ अपराध में दोषी
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की ओर से एक बयान जारी करके कहा गया, 'अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने दोनों को जुलाई नरसंहार के लिए मानवता के खिलाफ अपराध में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा का ऐलान किया है। इन फरार दोषियों को अगर कोई देश पनाह देेता है तो यह अत्यंत यह शत्रुतापूर्ण कृत्य में रखा जाएगा। ये न्याय की अवहेलना माना जाएगा।
2013 की प्रत्यर्पण संधि का हवाला दिया
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत के साथ 2013 की प्रत्यर्पण संधि का हवाला दिया। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए कहा, 'दोनों देशों के बीच मौजूदा प्रत्यर्पण संधि के तहत इन दोषियों को बांग्लादेश को सौंपने को भारत का अनिवार्य कृत्य बताया है। बयान में कहा गया, हम भारत सरकार से इन दोनों को तुरंत बांग्लादेशी अधिकारियों के हवाले करने की अपील करते हैं।'