मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और ईरान से प्रभावित तेल आपूर्ति का असर अब दक्षिण एशिया में भी दिखाई देने लगा है। तेल के लिए बाहरी आपूर्ति पर निर्भर देशों में चिंता बढ़ गई है। इसी बीच भारत ने पड़ोसी धर्म निभाते हुए बांग्लादेश की मदद का फैसला किया है। भारत बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल की आपूर्ति करेगा, जिससे वहां संभावित ईंधन संकट को कम करने में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
युद्ध का असर तेल आपूर्ति पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कई देश जो ईरान और खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात करते हैं, उन्हें अब आपूर्ति में अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बांग्लादेश भी उन देशों में शामिल है जो ऊर्जा जरूरतों के लिए बाहरी आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर हैं।
भारत ने भेजी 5,000 टन डीजल की खेप
ऐसे हालात में भारत ने बांग्लादेश की मदद के लिए आगे आकर 5,000 टन डीजल भेजने का निर्णय लिया है। यह खेप मंगलवार को पारबतिपुर सीमा के रास्ते बांग्लादेश पहुंचने की उम्मीद है। यह आपूर्ति दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद ऊर्जा समझौते के तहत की जा रही है। इस समझौते के अनुसार भारत हर साल पाइपलाइन के माध्यम से बांग्लादेश को लगभग 1,80,000 टन डीजल की आपूर्ति करता है।
समझौते के तहत तय मात्रा की आपूर्ति
बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के अधिकारियों के अनुसार मौजूदा खेप इसी वार्षिक समझौते का हिस्सा है। समझौते के तहत छह महीने की अवधि में कम से कम 90,000 टन डीजल बांग्लादेश को आयात करना होता है। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान संकट के बावजूद तय आपूर्ति को समय पर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि देश में ऊर्जा जरूरतों को संतुलित रखा जा सके।
दो महीने में पूरी आपूर्ति की उम्मीद
ऊर्जा अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल 5,000 टन डीजल की खेप पहुंचने वाली है और उम्मीद है कि अगले दो महीनों के भीतर छह महीने के लिए निर्धारित पूरी डीजल मात्रा आयात कर ली जाएगी। इससे देश में ईंधन की उपलब्धता बनी रहेगी और संभावित संकट को टालने में मदद मिल सकती है। सरकार का कहना है कि आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
अवैध भंडारण पर सख्ती
इस बीच बांग्लादेश में कुछ व्यापारियों द्वारा ईंधन का अवैध भंडारण कर कृत्रिम कमी पैदा करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इन रिपोर्टों को देखते हुए ऊर्जा मंत्रालय ने वाहनों की श्रेणियों के आधार पर ईंधन आपूर्ति की सीमा तय कर दी है। साथ ही अवैध भंडारण और नियमों से अधिक बिक्री रोकने के लिए मोबाइल कोर्ट अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसके तहत कई फ्यूल स्टेशनों पर जांच और कार्रवाई की गई है।