Self-Reliant in Drone Manufacturing: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बदलती वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत को ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने जोर दिया कि आने वाले समय में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक युद्ध की रणनीति में अहम भूमिका निभाएंगी।
वैश्विक संघर्षों से बढ़ी जरूरत
रक्षा मंत्री ने रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजरायल संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने ड्रोन तकनीक की अहमियत को साबित किया है। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में इन तकनीकों की भूमिका और भी बढ़ने वाली है।
मजबूत इकोसिस्टम की जरूरत
दिल्ली में आयोजित नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव 2026 में उन्होंने कहा कि भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना होगा। इसमें डिजाइन, सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी जैसे सभी पुर्जों का देश में ही निर्माण जरूरी है।
भारत की रक्षा तैयारियों और सामरिक स्वायत्तता के लिए यह आवश्यक है कि देश ड्रोन निर्माण में पूरी तरह आत्मनिर्भर बने और आने वाले वर्षों में ड्रोन निर्माण का ग्लोबल हब बने। pic.twitter.com/7bQc4Otweb
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) March 19, 2026
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नई तकनीकों पर भी जोर
राजनाथ सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के बढ़ते महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये तकनीकें विनिर्माण क्षेत्र में बड़े बदलाव ला रही हैं और भारत को इन्हें तेजी से अपनाना चाहिए।
MSME को बढ़ावा
रक्षा मंत्री ने MSME और स्टार्टअप्स की भूमिका को अहम बताते हुए iDEX के तहत नए चैलेंज लॉन्च किए। उन्होंने उद्योग जगत से गुणवत्ता सुधार और नवाचार पर ध्यान देने की अपील की, ताकि भारत रक्षा उत्पादन में वैश्विक केंद्र बन सके।