भारत ने सोशल सिक्योरिटी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) के अनुसार अब देश में 100 करोड़ से ज्यादा लोग सोशल सिक्योरिटी के दायरे में आ चुके हैं। हैदराबाद में हुई ब्रिक्स देशों के श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक में ILO के महानिदेशक गिल्बर्ट एफ. होंगबो ने कहा कि भारत का यह मॉडल दूसरे देशों के लिए भी सीख बन सकता है। उन्होंने पिछले एक दशक में भारत के सोशल सिक्योरिटी सिस्टम के तेजी से विस्तार की सराहना की।
10 साल में चार गुना से ज्यादा बढ़ा दायरा
केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बताया कि वर्ष 2015 में देश में सिर्फ 25 करोड़ लोग यानी करीब 19 प्रतिशत आबादी सोशल सिक्योरिटी से जुड़ी थी। अब 2026 में यह संख्या बढ़कर 100 करोड़ से अधिक यानी 68.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उनके मुताबिक यह बदलाव सरकारी योजनाओं को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने और हर वर्ग को सुरक्षा देने की दिशा में बड़ा कदम है।
ब्रिक्स बैठक में रोजगार पर मंथन
भारत की अध्यक्षता में हैदराबाद में हुई ब्रिक्स श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक में सोशल सिक्योरिटी, रोजगार, महिलाओं की भागीदारी, कौशल विकास और डिजिटल तकनीक जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और रोजगार से जुड़ी बेहतर नीतियों को साझा करना था। बैठक के अंत में सभी देशों ने साझा घोषणा पत्र को भी मंजूरी दी।
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भारत ने गिनाए बड़े सुधार
बैठक के दौरान भारत ने अपने श्रम सुधारों की भी जानकारी दी। सरकार ने बताया कि 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नए लेबर कोड तैयार किए गए हैं। ई-श्रम पोर्टल पर अब तक 31.7 करोड़ से ज्यादा असंगठित क्षेत्र के कामगार पंजीकृत हो चुके हैं। वहीं नेशनल करियर सर्विस पोर्टल के जरिए नौकरी, कौशल और करियर से जुड़ी कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का कहना है कि इससे कामगारों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंच रहा है।
दुनिया के रोजगार बाजार पर भी नजर
सरकार ने बताया कि भारत अपने कुशल युवाओं को वैश्विक रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी तेजी से काम कर रहा है। देश में इस समय 2100 से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर काम कर रहे हैं, जहां करीब 23.5 लाख पेशेवर कार्यरत हैं। इन केंद्रों से हर साल लगभग 98 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व प्राप्त हो रहा है। इसे भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
BRICS Connect से बढ़ेगा सहयोग
बैठक के दौरान भारत ने BRICS Connect नाम की नई पहल भी शुरू की। इसका मकसद सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग, ज्ञान साझा करने और रोजगार से जुड़े सुधारों को आगे बढ़ाना है। इस मंच के जरिए सोशल सिक्योरिटी, डिजिटल रोजगार सेवाओं, भविष्य की जरूरत वाले कौशल और श्रम बाजार से जुड़े अनुभव साझा किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे सदस्य देशों के बीच सहयोग और मजबूत होगा तथा रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।
