घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार की शुरुआत निवेशकों के लिए झटका लेकर आई। सुबह के कारोबार में ही बाजार ने तेज गिरावट के संकेत दे दिए। कमजोर वैश्विक संकेत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये पर बढ़ते दबाव का असर सीधे इक्विटी मार्केट पर दिखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में फिसलते नजर आए, वहीं कई दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
शुरुआती कारोबार में बाजार लड़खड़ाया
मंगलवार सुबह करीब 10:19 बजे के आसपास बीएसई सेंसेक्स 427 अंकों से ज्यादा टूटकर 84,786 के स्तर तक आ गया। वहीं एनएसई निफ्टी भी 125 अंकों की गिरावट के साथ 25,902 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती सत्र में बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि बाजार संभलता नजर नहीं आया।
इन बड़े शेयरों में आई जोरदार गिरावट
आज के कारोबार में बैंकिंग, मेटल और आईटी सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। एक्सिस बैंक, टाटा स्टील, जियो फाइनेंशियल, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसे दिग्गज शेयर टॉप लूजर्स की सूची में रहे। इसके अलावा इंफोसिस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली।
गिने-चुने शेयरों ने दी राहत
हालांकि पूरी तरह मायूसी का माहौल नहीं रहा। निफ्टी में कुछ चुनिंदा शेयरों ने मजबूती दिखाई। टाटा कंज्यूमर, भारती एयरटेल, अपोलो हॉस्पिटल्स, टाइटन और एशियन पेंट्स जैसे स्टॉक्स हरे निशान में कारोबार करते दिखे। एफएमसीजी और टेलीकॉम सेक्टर ने गिरते बाजार में थोड़ी राहत जरूर दी।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में
सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। दोनों ही इंडेक्स करीब 0.4 फीसदी तक टूटे, जिससे साफ है कि गिरावट का दायरा पूरे बाजार में फैला हुआ है।
रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई टेंशन
शेयर बाजार के साथ-साथ रुपये ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। मंगलवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 90.87 पर खुला। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं ने रुपये पर दबाव बनाए रखा। हालांकि डॉलर में नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये को और ज्यादा टूटने से कुछ हद तक बचाया।
आगे क्या रहेगी बाजार की चाल?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्पष्ट संकेत नहीं मिलते और विदेशी निवेशकों की बिकवाली नहीं रुकती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और लंबी अवधि की रणनीति के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है।