भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है, जहां पाकिस्तान ने 27वें संविधान संशोधन के माध्यम से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को चीफ ऑफ डिफेंस फॉर्स का दर्जा दिया है। भारत ने इसे "संवैधानिक तख्तापलट" कहा है और पाकिस्तान से अपने गिरेबान में झांकने की सलाह दी है। भारत के प्रतिनिधि पर्वतानेनी हरीश ने कहा कि पाकिस्तान को कानून के शासन पर आत्मचिंतन करना चाहिए और यह सवाल करना चाहिए कि उसने कैसे सशस्त्र सेनाओं को संवैधानिक तख्तापलट करने की इजाजत दी और अपने चीफ ऑफ डिफेंस फॉर्स को आजीवन प्रतिरक्षा प्रदान की।
गिरफ्तारी और कोर्ट केस से मुक्ति दी गई
इस संशोधन के तहत, आसिम मुनीर को न केवल तीनों सेनाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई है, बल्कि उन्हें पद से मुक्त होने के बाद भी गिरफ्तारी और कोर्ट केस से मुक्ति दी गई है। पाकिस्तान में 27वें संविधान संशोधन के बाद प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। सरकार इसे न्यायपालिका में सुधार और सैन्य ढांचे में बदलाव के रूप में देख रही है, जबकि विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया है और इसे पाकिस्तान के संविधान के लिए खतरा बताया है।
सुधार की दिशा में एक कदम मानते हैं
कानूनी विशेषज्ञों की राय भी बंटी हुई है। कुछ इसे न्यायपालिका पर कार्यपालिका का नियंत्रण बढ़ाने वाला कदम मानते हैं, जबकि अन्य इसे सुधार की दिशा में एक कदम मानते हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे सुप्रीम कोर्ट कमजोर होकर अप्रासंगिक हो जाएगा और न्यायपालिका पर कार्यपालिका का नियंत्रण बढ़ जाएगा।
संवैधानिक अधिकार दिए जाएंगे
इस संशोधन के तहत, एक नए 'संविधानिक न्यायालय' की स्थापना की जाएगी, जो संवैधानिक महत्व के मामलों की सुनवाई करेगा। साथ ही, सेना प्रमुख को जीवनभर के लिए संवैधानिक अधिकार दिए जाएंगे।