प्रधानमंत्री Narendra Modi का यूरोप मिशन लगातार आगे बढ़ रहा है। नीदरलैंड के बाद अब उनकी अगली महत्वपूर्ण यात्रा स्वीडन की ओर है, जहां वे 8 साल बाद पहुंच रहे हैं। यह दौरा 5 देशों की कूटनीतिक श्रृंखला का हिस्सा है। स्वीडन में व्यापार, निवेश, एआई, स्टार्टअप और वैश्विक सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर चर्चा होने की संभावना है, जिससे भारत-यूरोप साझेदारी को नई दिशा मिल सकती है।
स्वीडन दौरे की कूटनीतिक पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा स्वीडन के प्रधानमंत्री Ulf Kristersson के आमंत्रण पर हो रहा है। 17–18 मई के इस दो दिवसीय कार्यक्रम में द्विपक्षीय संबंधों की पूरी समीक्षा की जाएगी। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। यह यात्रा भारत और यूरोपीय देशों के बीच रणनीतिक भरोसे को और मजबूत करने का अवसर मानी जा रही है।
एआई और नई तकनीक पर केंद्रित बातचीत
इस दौरे में सबसे अहम फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती तकनीक, स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल इनोवेशन पर रहेगा। स्वीडन यूरोप का एक मजबूत टेक हब माना जाता है, जहां प्रति व्यक्ति यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या काफी अधिक है। भारत भी इस अनुभव से सीख लेकर अपने डिजिटल ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
व्यापार और निवेश में नई संभावनाएं
भारत और स्वीडन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 में लगभग 7.75 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। स्वीडिश कंपनियों का भारत में निवेश भी लगातार बढ़ रहा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, औद्योगिक साझेदारी और सप्लाई चेन मजबूती जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।
वैश्विक मुद्दों पर रणनीतिक चर्चा
इस बैठक में ईरान-अमेरिका संघर्ष के आर्थिक प्रभाव, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक सुरक्षा जैसे विषय भी एजेंडे में रह सकते हैं। यूरोप और भारत दोनों ही बदलते वैश्विक परिदृश्य में स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
यूरोपियन यूनियन के साथ बड़ा मंच
इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि प्रधानमंत्री मोदी और स्वीडन नेतृत्व यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen के साथ मिलकर यूरोपीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन को संबोधित कर सकते हैं। यह मंच भारत-ईयू साझेदारी को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।