India Switzerland 100 Billion Investment : भारत और स्विट्जरलैंड ने सोमवार को अपने रिश्तों को आर्थिक सहयोग से आगे बढ़ाते हुए निवेश, रोजगार, तकनीक, शोध और युवाओं के लिए कई नई पहल शुरू कीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन के बीच नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई बैठक के दौरान कई समझौतों और पहलों का ऐलान किया गया। सबसे बड़ा लक्ष्य अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और इससे 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने का है। यह लक्ष्य भारत-EFTA Trade and Economic Partnership Agreement (TEPA) से जुड़ा है।
15 साल में 100 अरब डॉलर निवेश
भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन यानी EFTA के बीच TEPA 1 अक्टूबर 2025 से लागू है। इसके तहत EFTA देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश बढ़ाने और इससे 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा है। इसमें पहले 10 वर्षों में 50 अरब डॉलर और अगले पांच वर्षों में 50 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य शामिल है। निवेश का फोकस उत्पादन क्षमता, तकनीक, शोध और नवाचार जैसे क्षेत्रों पर है।
युवाओं के लिए बढ़ेंगे मौके
दोनों देशों ने Migration and Mobility Partnership के साथ Young Professionals Agreement पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत दोनों देशों के 300-300 युवा प्रोफेशनल्स को हर साल दूसरे देश में अस्थायी रोजगार का अवसर मिलेगा। जरूरत और आपसी सहमति से यह संख्या 500 तक बढ़ सकती है। इसके अलावा भारतीय छात्रों के लिए एक साल के नवीकरणीय परमिट और कुछ मामलों में पांच साल तक के मल्टीपल-एंट्री वीजा की व्यवस्था भी की गई है।
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EV से टनल तक तकनीकी सहयोग
भारत और स्विट्जरलैंड ने परिवहन तकनीक, Mobility Systems और Infrastructure को लेकर भी समझौता किया है। इसके दायरे में इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, टनल, सर्कुलर इकोनॉमी और टिकाऊ परिवहन ढांचा शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी रोपवे, जेवर एयरपोर्ट और पहाड़ी इलाकों में रेलवे व टनल परियोजनाओं को दोनों देशों के सहयोग के उदाहरण के तौर पर बताया। स्विस कंपनियों को भारत में निवेश, डिजाइन और निर्माण क्षमता बढ़ाने में भागीदारी का भी न्योता दिया गया है।
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रिसर्च और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा
विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी दो अहम पहल हुईं। भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और Swiss National Science Foundation के बीच Letter of Intent हुआ है, जिसका उद्देश्य संयुक्त शोध के लिए सहयोग का ढांचा तैयार करना है। वहीं Zurich University of Applied Sciences के साथ Innovation, Technology Transfer और Entrepreneurship में सहयोग के लिए समझौता किया गया है। इसके तहत शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स के लिए Indo-Swiss Academia-Industry Training कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके अलावा Indo-Swiss Research Flagship का पहला सत्र भी शुरू हुआ है।
रक्षा-परमाणु ऊर्जा पर भी बढ़ेगा सहयोग
भारत और स्विट्जरलैंड ने आर्थिक साझेदारी के साथ रक्षा और परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार दोनों देशों ने सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा उत्पादन में सहयोग के नए अवसरों की पहचान की है। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। साथ ही भारत-EFTA साझेदारी को कारोबारी स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए 7 अक्टूबर को Prosperity Summit आयोजित किया जाना है, जिसमें दोनों पक्षों के कारोबारी प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।