Bangladesh Violence: बांग्लादेश में जारी सियासी अस्थिरता और अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि इन घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हिंदू युवक दीपू दास की नृशंस हत्या की निंदा करते हुए कहा कि भारत को उम्मीद है कि दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा। भारत ने यह भी कहा कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल में हत्या, आगजनी और जमीन हड़पने जैसी हजारों घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें सिर्फ राजनीतिक हिंसा बताकर टाला नहीं जा सकता। भारत ने दोहराया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा उसकी गंभीर चिंता का विषय है।
हिंसा और चुनावी माहौल पर भारत की चिंता
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बांग्लादेश में फरवरी 2025 में प्रस्तावित आम चुनाव से पहले हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। इसी बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान की लंबे समय बाद ढाका वापसी ने राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ा दी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने कहा कि वह बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव का समर्थन करता है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह बांग्लादेश के आम नागरिकों के साथ मजबूत और सकारात्मक रिश्ते बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और वहां शांति व स्थिरता देखना चाहता है।
हिंदू युवकों की हत्या से बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव
बांग्लादेश में हाल के दिनों में हिंदू युवकों की हत्या ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। दीपू दास की हत्या के बाद राजबाड़ी में अमृत मंडल उर्फ सम्राट को भी भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। इन घटनाओं के बाद भारत समेत कई देशों में यूनुस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। भारत ने साफ संकेत दिए हैं कि अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार बांग्लादेश की आंतरिक समस्या भर नहीं हैं, बल्कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता से भी जुड़े हुए हैं।