भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. दूसरी तिमाही के GDP आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. अर्थव्यवस्था की इस तेजी के साथ भारत अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर भी फोकस बढ़ा रहा है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने फिक्की की वार्षिक आम बैठक में बताया कि भारत इस समय करीब 50 देशों और समूहों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर सक्रिय बातचीत कर रहा है.
'व्यापार समझौते में गहरी रुचि'
गोयल ने बताया कि भारत की बातचीत कई बड़े वैश्विक समूहों के साथ तेजी से आगे बढ़ रही है. इनमें यूरेशियन आर्थिक संघ प्रमुख है, जिसमें रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं. इसके अलावा खाड़ी देशों का समूह, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल जिसमें सऊदी अरब, UAE, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन आते हैं, जिन्होंने भारत के साथ व्यापार समझौते में गहरी रुचि दिखाई है. भारत पहले ही UAE के साथ एक बड़ा व्यापार समझौता लागू कर चुका है, जबकि ओमान के साथ वार्ता लगभग पूरी हो चुकी है. बहरीन और कतर ने भी भारत के साथ डील शुरू करने की इच्छा जताई है.
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इज़राइल के साथ भी जल्द बातचीत की योजना
वाणिज्य मंत्री के अनुसार भारत दुनिया के कई महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों के साथ बातचीत तेज कर चुका है. इसमें अमेरिका, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के 27 देश शामिल हैं. भारत ASEAN समूह और दक्षिण कोरिया के साथ मौजूदा समझौतों की भी समीक्षा कर रहा है. इज़राइल के साथ भी जल्द बातचीत शुरू करने की योजना है, जबकि कनाडा के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता पर अगले हफ्ते चर्चा शुरू होगी. इसका लक्ष्य 2030 तक भारत-कनाडा व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अपडेट
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बड़ा अपडेट देते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि इस डील के लिए 6 दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है और दोनों देश इसे आगे बढ़ा रहे हैं. लक्ष्य है कि साल के अंत तक समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जाए. उन्होंने कहा कि भारत विश्वसनीय साझेदारों के साथ मजबूत आर्थिक रिश्ते बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है, क्योंकि दुनिया ने देखा है कि व्यापार कई बार हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. भारत अब तक सिंगापुर, जापान, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया और कोरिया जैसे देशों के साथ कई व्यापक व्यापार समझौते लागू कर चुका है, जो आयात शुल्क में कमी, निवेश और पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाते हैं.