भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी जहां भी अब तक बल्लेबाजी के लिए उतरे, वहां उनके बल्ले की गूंज सुनाई दी। लेकिन अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 से ठीक पहले साउथ अफ्रीकी जमीन पर कहानी थोड़ी अलग दिखी। भारत और साउथ अफ्रीका के बीच अंडर-19 वनडे सीरीज का पहला मुकाबला वैभव के लिए बेहद खास था, क्योंकि पहली बार वह टीम इंडिया की कप्तानी कर रहे थे। महज 14 साल की उम्र में कप्तान बनना अपने आप में रिकॉर्ड था और इसी वजह से इस पारी पर सभी की नजरें टिकी थीं।
बल्ला नहीं चला, 11 रन पर खत्म सफर
कप्तानी के दबाव और नई परिस्थितियों के बीच वैभव इस मैच में बड़ी पारी नहीं खेल सके। साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहली ही पारी में वह 12 गेंदों में सिर्फ 11 रन बनाकर आउट हो गए। इस दौरान उनके बल्ले से 2 चौके निकले, लेकिन लय पकड़ने से पहले ही पारी का अंत हो गया। भारतीय पारी के 7वें ओवर की पहली गेंद पर वैभव पवेलियन लौटे और वह आउट होने वाले दूसरे बल्लेबाज बने। इससे पहले ओपनर ऐरन जॉर्ज भी सस्ते में आउट हो चुके थे, जिससे टीम इंडिया की शुरुआत लड़खड़ा गई।
कप्तानी मिली हालातों की मजबूरी में
दरअसल इस दौरे पर वैभव को कप्तानी नियमित योजना के तहत नहीं, बल्कि हालातों की वजह से मिली। अंडर-19 टीम के नियमित कप्तान आयुष म्हात्रे और उप-कप्तान विहान मल्होत्रा चोट के कारण इस सीरीज का हिस्सा नहीं बन सके। ऐसे में टीम मैनेजमेंट ने वैभव सूर्यवंशी पर भरोसा जताया और उन्हें जिम्मेदारी सौंपी। क्रिकेट इतिहास में सबसे कम उम्र के कप्तान बनने के साथ ही वैभव पर दबाव भी बढ़ गया था। यह मुकाबला उनके करियर का अहम मोड़ माना जा रहा था, लेकिन पहली ही पारी में बल्ले से बड़ी छाप नहीं लग सकी।
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टॉप ऑर्डर बिखरा, टीम पर बढ़ा दबाव
इस मैच में सिर्फ वैभव ही नहीं, बल्कि भारत का पूरा टॉप ऑर्डर संघर्ष करता दिखा। ऐरन जॉर्ज और वैभव के आउट होने के बाद विकेटकीपर अभिज्ञान कुंडू और वेदांत त्रिवेदी ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों के बीच 33 रन की साझेदारी जरूर बनी, लेकिन 14वें ओवर में कुंडू के रन आउट होते ही यह साझेदारी टूट गई। अगले ही ओवर में वेदांत त्रिवेदी भी आउट हो गए, जिससे भारतीय पारी पर दबाव और बढ़ गया। वर्ल्ड कप से पहले इस मुकाबले ने साफ कर दिया कि विदेशी हालातों में युवा टीम के लिए चुनौतियां कम नहीं होने वाली हैं।