नरेंद्र मोदी 15 मई को चार यूरोपीय देशों की यात्रा पर रवाना होंगे, लेकिन इस दौरान उनका कुछ घंटों का यूएई दौरा खास चर्चा में है। माना जा रहा है कि इस छोटे से स्टॉपओवर में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े दो बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इनमें LPG सप्लाई और स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व से जुड़े अहम समझौते शामिल बताए जा रहे हैं।
ईरान संकट के बीच बढ़ी भारत की चिंता
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए यह स्थिति देश के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
भारत के लिए क्यों अहम है यूएई
यूएई भारत के लिए कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा स्रोत है, जबकि LPG और LNG सप्लाई में उसका स्थान दूसरे नंबर पर है। खास बात यह है कि यूएई फिलहाल फुजैरा पोर्ट के जरिए तेल निर्यात कर रहा है, जो होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करता है। इससे वैश्विक संकट के बावजूद उसकी सप्लाई अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है।
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उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में यूएई
यूएई फिलहाल रोजाना 3.2 से 3.6 मिलियन बैरल तेल उत्पादन कर रहा है और आने वाले समय में इसे 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाने की योजना बना रहा है। यही वजह है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए यूएई के साथ संबंध और गहरे करने की कोशिश में है।
भारत के लिए क्या होगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये समझौते होते हैं, तो भारत को LPG और तेल सप्लाई में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे भविष्य में संभावित ऊर्जा संकट, महंगे आयात और सप्लाई बाधाओं के असर को कम करने में राहत मिल सकती है। साथ ही भारत अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को भी और मजबूत कर सकेगा।