भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की चौथी अनुसूची के तहत 23 पाकिस्तान आधारित व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया है। सूची में ऐसे कई नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जिन पर भर्ती, घुसपैठ, फंडिंग, हथियार सप्लाई और भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े आरोप हैं। इस फैसले के बाद जांच एजेंसियों को कानूनी और वित्तीय स्तर पर कार्रवाई के लिए अतिरिक्त अधिकार मिल सकते हैं।
जैश और लश्कर से जुड़े नाम सूची में शामिल
सरकारी कार्रवाई के दायरे में आए कई व्यक्तियों के संबंध कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठनों से बताए जा रहे हैं। इनमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई ऑपरेटिव और वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के बाद इन व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दायरा और व्यापक हो गया है।
भर्ती, फंडिंग और घुसपैठ जैसे आरोप
सूची में शामिल व्यक्तियों पर अलग-अलग तरह के आरोप लगाए गए हैं। इनमें आतंकी नेटवर्क के लिए भर्ती करना, प्रशिक्षण देना, घुसपैठ की योजना बनाना, हथियारों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और आर्थिक सहायता जुटाने जैसे आरोप शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियां इन गतिविधियों को लंबे समय से निगरानी में रखे हुए थीं।
कानूनी कार्रवाई का दायरा होगा मजबूत
UAPA के तहत किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद एजेंसियों को उसकी संपत्ति, फंडिंग नेटवर्क और अन्य गतिविधियों पर कार्रवाई करने का अधिकार मिलता है। इससे संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क और संसाधनों पर भी निगरानी बढ़ाई जा सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अहम कदम
सरकार का यह कदम आतंकवाद से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे नेटवर्क की पहचान और निगरानी पर काम कर रही हैं, जो सीमा पार से गतिविधियों को संचालित करने के आरोपों के दायरे में आते हैं।