भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ सामाजिक सुरक्षा समझौता (Social Security Agreement) 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) भी प्रभावी होगा। इस फैसले से ब्रिटेन में काम कर रहे हजारों भारतीय पेशेवरों और भारतीय कंपनियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
भारतीय कर्मचारियों को कैसे होगा लाभ?
इस समझौते के तहत भारत या ब्रिटेन की कंपनियों द्वारा अस्थायी रूप से दूसरे देश भेजे गए कर्मचारियों को मेजबान देश में सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Social Security Contribution) देने से छूट मिलेगी। यह छूट अधिकतम पांच साल तक लागू रहेगी। यानी भारतीय कर्मचारी भारत में योगदान देते रहेंगे और उन्हें ब्रिटेन में दोबारा भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
कंपनियों की लागत होगी कम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारतीय कंपनियों का खर्च काफी कम होगा। खासकर आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियां जैसे टीसीएस और इन्फोसिस को इसका बड़ा लाभ मिल सकता है। कर्मचारियों पर होने वाला अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा खर्च घटने से भारतीय कंपनियां ब्रिटेन के बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी।
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75 हजार भारतीय पेशेवरों को राहत
ब्रिटेन में इस समय करीब 75 हजार भारतीय पेशेवर काम कर रहे हैं, जबकि 900 से अधिक भारतीय कंपनियां वहां सक्रिय हैं। एक भारतीय पेशेवर का औसत सालाना वेतन 40 हजार से 50 हजार पाउंड के बीच माना जाता है। आमतौर पर वेतन का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक सुरक्षा अंशदान के रूप में जमा करना पड़ता है। अब इस बोझ से काफी हद तक राहत मिलेगी।
हर साल करोड़ों डॉलर का योगदान
जानकारी के अनुसार भारतीय मूल के पेशेवर हर साल ब्रिटेन की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में करीब 50 करोड़ डॉलर का योगदान देते हैं। जबकि ब्रिटेन में सामाजिक सुरक्षा लाभ पाने के लिए लगभग 10 साल तक सेवा करना जरूरी होता है। ऐसे में अस्थायी रूप से काम करने वाले कई भारतीयों को इस योगदान का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। नया समझौता इसी समस्या का समाधान माना जा रहा है।
भारत-ब्रिटेन व्यापार को मिलेगा बल
यह समझौता सिर्फ कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों के लिए भी अहम माना जा रहा है। ब्रिटेन भारत के 283 अरब डॉलर के आईटी उद्योग का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और कुल निर्यात में लगभग 17 प्रतिशत योगदान देता है। वर्ष 2024 में भारत का ब्रिटेन को सेवा निर्यात 21.6 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 13.7 अरब डॉलर था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता आने वाले समय में सेवा क्षेत्र और निवेश को नई रफ्तार दे सकता है।