भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही बहुप्रतीक्षित व्यापार वार्ता अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। वॉशिंगटन से मिल रहे संकेत बता रहे हैं कि दोनों देश जल्द ही एक बड़े समझौते पर सहमति जता सकते हैं। सूत्रों के अनुसार अधिकतर मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ संवेदनशील बिंदुओं पर अंतिम चर्चा जारी है। दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी लगातार बैठकों में शामिल हैं, जिससे समझौते की उम्मीद और मजबूत हुई है।
टैरिफ और बाजार पहुंच सबसे बड़ा मुद्दा
इस डील का केंद्र व्यापारिक बाधाओं को कम करना और बाजारों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना है। भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में उसके उत्पादों को ज्यादा अवसर मिलें, जिससे निर्यात में तेजी आए। दूसरी ओर अमेरिका भारतीय बाजार में अपनी कंपनियों और उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रहा है। अगर यह समझौता होता है तो कई क्षेत्रों में शुल्क कम हो सकते हैं और व्यापारिक रास्ते आसान बन सकते हैं।
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नीतियों में बदलाव से तेज हुई रफ्तार
हाल के महीनों में अमेरिकी व्यापार नीतियों में हुए बदलावों ने बातचीत को नई दिशा दी है। अस्थायी टैरिफ जैसे फैसलों के बाद दोनों देशों ने कई प्रावधानों की फिर से समीक्षा की। इसी वजह से रुकी हुई प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक माहौल में भारत और अमेरिका दोनों के लिए यह समझौता रणनीतिक रूप से भी अहम है।
क्षेत्रीय हलचल और बड़े ऐलान की उम्मीद
इस संभावित डील ने दक्षिण एशिया में भी हलचल बढ़ा दी है। खासतौर पर पाकिस्तान में इसे लेकर चिंता और चर्चा तेज बताई जा रही है, क्योंकि क्षेत्रीय समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि यह समझौता व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई दे सकता है। अब नजरें आने वाले दिनों पर टिकी हैं, जब दोनों देशों की ओर से किसी बड़े आधिकारिक ऐलान की संभावना जताई जा रही है।