कुछ समय पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक भारी टैरिफ लगाने की बात कही थी। इस बयान के बाद भारत की चिंता बढ़ गई थी क्योंकि भारत लंबे समय से रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदता रहा है। आशंका जताई जा रही थी कि अगर यह फैसला लागू हुआ तो भारत के निर्यात और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
तेल खरीद में कटौती से बदली तस्वीर
हालात अब पहले जैसे नहीं हैं। भारत ने हाल के महीनों में रूस से कच्चे तेल की खरीद में काफी हद तक कटौती की है। इसी वजह से भारत पर 500 प्रतिशत जैसे भारी टैरिफ का खतरा लगभग खत्म होता नजर आ रहा है। जानकारों का कहना है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत ने संतुलन बनाते हुए अपने कदम आगे बढ़ाए हैं।
ट्रेड डील बनी राहत की सबसे बड़ी वजह
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील अब पूरी होने के करीब मानी जा रही है। यही वजह है कि टैरिफ को लेकर माहौल नरम पड़ता दिख रहा है। दोनों देश समझते हैं कि व्यापारिक रिश्ते बिगड़ने से किसी को फायदा नहीं होगा। ऐसे में बातचीत को तेज किया गया है।
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वाणिज्य सचिव का अहम बयान
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने साफ कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर लगातार चर्चा चल रही है। उन्होंने बताया कि ऊंचे टैरिफ के बावजूद अमेरिका को भारत का निर्यात बढ़ा है। उनके मुताबिक दोनों देशों को भरोसा है कि किसी न किसी रूप में समझौता जरूर होगा और बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
किन मुद्दों पर फंसी थी बातचीत
अब तक इस ट्रेड डील में देरी की सबसे बड़ी वजह कृषि और डेयरी क्षेत्र रही है। भारत इन क्षेत्रों को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह खोलने के पक्ष में नहीं है। फिलहाल अमेरिका ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया हुआ है, जिसमें बेस टैरिफ के साथ रूस और ईरान से जुड़े अतिरिक्त शुल्क भी शामिल रहे हैं।
आगे क्या मिल सकती है भारत को राहत
वाणिज्य सचिव के ताजा बयान से संकेत मिल रहा है कि दोनों देशों के बीच जमी बर्फ पिघल सकती है। अगर ट्रेड डील पर सहमति बनती है तो न सिर्फ अतिरिक्त टैरिफ का खतरा टलेगा, बल्कि भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्तों को भी नई मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा हालात में यह समझौता अब सिर्फ समय की बात रह गई है।