
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में रही ट्रेड डील इसी माह फाइनल हो सकती है। भले ही अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ लागू किया हो, लेकिन भारत संयम बरतते हुए समझदारी से इस डील की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमेरिका की प्रतिनिधि टीम 24 अगस्त को भारत पहुंचेगी, जहां छठे दौर की बातचीत में अंतिम सहमति बनने की उम्मीद है। इस डील से भारत को ऊर्जा आयात में नए विकल्प मिल सकते हैं, जिससे व्यापार संतुलन बेहतर हो सकता है।
ऊर्जा सेक्टर में बड़ी डील की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच होने वाली इस ट्रेड डील में ऊर्जा आयात सबसे अहम मुद्दा रहेगा। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल की निर्भरता कम करे और अमेरिकी ऊर्जा संसाधनों को प्राथमिकता दे। इस डील के तहत भारत अमेरिका से कच्चे तेल और LNG जैसे उत्पादों का आयात बढ़ा सकता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
डील के जरिए चीन को टक्कर देने की रणनीति
भारत इस डील को सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसका भू-राजनीतिक संतुलन पर भी असर पड़ेगा। भारत चाहता है कि यह समझौता इस तरह से हो जिससे चीन को अनावश्यक लाभ न मिल सके और एशिया में रणनीतिक संतुलन भारत के पक्ष में जाए।
रूस से संबंधों पर कायम रहेगा भारत का रुख
हालांकि अमेरिका भारत से रूस से व्यापार खत्म करने की अपेक्षा रखता है, लेकिन भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह बहुपक्षीय नीति पर ही काम करेगा। भारत करीब 40 देशों से तेल आयात करता है और यह विविधता उसकी ऊर्जा नीति की रीढ़ है।