भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी व्यापार वार्ता में अब नई तेजी देखने को मिल रही है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, हालिया बैठकों में कई सकारात्मक प्रगति हुई है। खास बात यह है कि अमेरिका ने भारत की रूसी तेल खरीद पर अपने पहले के टकराव वाले रुख से नरम होते हुए व्यापार पर रचनात्मक बातचीत की इच्छा जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे महीनों से रुकी वार्ताओं में फिर से जान आ गई है।
दो समानांतर मुद्दों पर चल रही है बड़ी बातचीत
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अमेरिका और भारत के बीच दो समानांतर मोर्चों पर बातचीत जारी है—पहला, पारस्परिक व्यापार समझौता और दूसरा, रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिका की चिंताएं। अधिकारियों का दावा है कि बाजार में हालिया सुधार और भारत की पारदर्शिता ने अमेरिका के साथ बातचीत को सहज बनाया है। हालांकि समझौते को अंतिम रूप देने से पहले अभी काफी काम बाकी है, लेकिन उम्मीद है कि साल के अंत तक किसी ठोस नतीजे की घोषणा हो सकती है।
डील से टैरिफ में संतुलन और कारोबारियों को राहत
प्रस्तावित व्यापार समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच नए अवसर खोलेगा। इसमें अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर टैरिफ कम करने, भारतीय व्यापारियों के लिए अमेरिका में बाजार पहुंच बढ़ाने और भारत के लिए अमेरिकी बाज़ार में बेहतर एंट्री जैसी सुविधाओं की उम्मीद है। यह खबर तब आई है जब व्हाइट हाउस अर्जेंटीना, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर और ग्वाटेमाला के साथ शुरुआती व्यापार समझौतों का ऐलान कर चुका है, जो अमेरिकी बाजार में उपलब्ध न होने वाली वस्तुओं पर नए विकल्प प्रदान करेंगे।
नई नियुक्तियां और कूटनीतिक तालमेल से बढ़ी उम्मीदें
अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर के भारत आगमन के बाद से व्यापार वार्ता को नई गति मिली है। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि भारतीय आयात पर टैरिफ में कटौती संभावित सफल व्यापार वार्ता का हिस्सा हो सकती है। वहीं, वियतनाम, इंडोनेशिया और स्विट्ज़रलैंड के साथ भी अमेरिका की सकारात्मक बातचीत जारी है, जो बहुपक्षीय ढाँचों के बजाय लक्षित व्यापार समझौतों की नई रणनीति को दर्शाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा माहौल भारत–अमेरिका संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जा सकता है।