भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में रही ट्रेड डील को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने कहा है कि यह डील किसी टैरिफ या नीतिगत मतभेद के कारण नहीं, बल्कि इसलिए अटक गई क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे फोन नहीं किया। इस बयान के बाद भारत-अमेरिका संबंधों और कूटनीतिक शिष्टाचार पर नई बहस छिड़ गई है।
India-US Trade Deal पर क्यों फंसी बात?
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा था। ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद से ही इस समझौते पर बातचीत चल रही थी। कृषि, डेयरी सेक्टर और रूस से भारत के तेल आयात जैसे मुद्दे पहले से ही संवेदनशील थे, लेकिन अब एक नया कारण सामने आया है।
हॉवर्ड लुटनिक का बड़ा खुलासा
एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि ट्रेड डील का ढांचा पूरी तरह तैयार था। उनके मुताबिक, डील को अंतिम रूप देने के लिए बस एक औपचारिक बातचीत बाकी थी। यह बातचीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर होनी थी, लेकिन भारत सरकार इसके लिए सहज नहीं थी।
मोदी का रुख और भारत की प्राथमिकताएं
प्रधानमंत्री मोदी पहले ही साफ कर चुके हैं कि भारत अपने किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों से समझौता नहीं करेगा। इसके साथ ही रूस से तेल खरीदने के फैसले को भी भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ा है। ऐसे में भारत ने किसी भी दबाव में आकर जल्दबाज़ी दिखाने से परहेज किया।
ट्रंप की नाराज़गी और टैरिफ की मार
लुटनिक के दावे के अनुसार, पीएम मोदी के फोन न करने से ट्रंप के अहं को ठेस पहुंची। अमेरिका का दावा है कि इसी नाराज़गी के चलते भारत पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया गया। ट्रंप समय-समय पर यह चेतावनी भी देते रहे हैं कि अगर भारत रूस से तेल खरीद बंद नहीं करता, तो शुल्क और बढ़ सकते हैं।
सीज़फायर क्रेडिट विवाद भी बना वजह
भारत-पाकिस्तान सीज़फायर को लेकर भी ट्रंप उम्मीद कर रहे थे कि उन्हें इसका श्रेय मिलेगा। लेकिन पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर अमेरिका को कोई सार्वजनिक क्रेडिट नहीं दिया। यह बात भी वॉशिंगटन को खटकती रही और रिश्तों में तल्खी बढ़ती गई।
क्या अब नई शर्तों पर होगी डील?
हॉवर्ड लुटनिक ने साफ कहा है कि पहले जिस ट्रेड डील पर सहमति बनी थी, वह अब वैध नहीं रही। अब भारत और अमेरिका को नई शर्तों पर फिर से बातचीत करनी होगी। हालांकि दोनों देश यह संकेत दे चुके हैं कि बातचीत का रास्ता बंद नहीं हुआ है और भविष्य में नई डील की संभावना बनी हुई है।