भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील पर आखिरकार सहमति बन गई है। सोमवार देर रात इस समझौते का ऐलान होते ही शेयर बाजार और रुपये में जबरदस्त हलचल देखने को मिली। ऊंचे अमेरिकी टैरिफ की वजह से भारतीय कंपनियों को जो नुकसान हो रहा था, अब उसमें बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस डील के बाद बाजार में भरोसा लौटा है और निवेशकों का माहौल भी बदला नजर आ रहा है।
SBI चेयरमैन का बयान, इकोनॉमी के लिए बड़ी राहत
देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने इंडिया-यूएस ट्रेड डील को घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से टैरिफ का भारी बोझ कम हुआ है, जिससे व्यापार को सीधा फायदा मिलेगा। शेट्टी के मुताबिक, भारत सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि कई दूसरे देशों के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर काम कर रहा है, जिससे निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
टैरिफ कट से कैसे बदले हालात
अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले जवाबी शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। पहले ऊंचे टैरिफ की वजह से भारतीय सामान महंगे हो रहे थे, जिससे ऑर्डर घट रहे थे और कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा था। अब टैरिफ कम होने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में सस्ते होंगे, जिससे डिमांड बढ़ने की उम्मीद है और कारोबार को रफ्तार मिलेगी।
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वित्त मंत्री का बयान, ‘मेड इन इंडिया’ को बढ़ावा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिकी शुल्क में कटौती का स्वागत करते हुए इसे ‘मेड इन इंडिया’ के लिए बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि अब भारतीय सामानों को अमेरिका में कम टैक्स देना होगा, जिससे देश के निर्यातकों को फायदा मिलेगा। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत को दिया और कहा कि इससे दोनों देशों के लोगों को लाभ होगा।
किन सेक्टर्स को मिलेगा सीधा फायदा
ट्रेड डील के बाद कपड़ा और चमड़ा जैसे सेक्टर्स में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। मंगलवार सुबह इन सेक्टर्स के कई शेयरों में 20 प्रतिशत तक का उछाल आया। लंबे समय से इन उद्योगों पर ऊंचे टैरिफ का दबाव था, जिससे मुनाफा घट रहा था। अब टैरिफ कट से इन कंपनियों की लागत कम होगी और कमाई बढ़ने की उम्मीद है।
नुकसान से राहत की उम्मीद, आगे क्या?
ऊंचे टैरिफ की वजह से भारतीय निर्यातकों को जो नुकसान हो रहा था, इस डील से उसकी भरपाई संभव लग रही है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि असली असर आने वाले महीनों में दिखेगा। अगर निर्यात बढ़ता है और निवेश का माहौल मजबूत रहता है, तो यह डील भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। अब सभी की नजर इस पर है कि यह समझौता जमीन पर कितना असर दिखाता है।