India US Trade Deal Delay : भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन डील पर हस्ताक्षर अभी जल्द होते नहीं दिख रहे हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा है कि दोनों देश बातचीत के अंतिम चरण में हैं, लेकिन समझौता अभी तत्काल होने वाला नहीं है। 5 अक्टूबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी बातचीत को ‘प्लेटो’ पर पहुंचने और आगे की रियायतों की गुंजाइश सीमित होने की बात कही।
टैरिफ पर अब भी बनी सहमति की कमी
भारत और अमेरिका के बीच सबसे अहम मुद्दों में टैरिफ और बाजार पहुंच शामिल हैं। फरवरी 2026 के संयुक्त बयान में दोनों देशों ने एक अंतरिम समझौते की रूपरेखा पर सहमति जताई थी। इसमें अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर पारस्परिक टैरिफ को 18 फीसदी करने की बात कही थी और भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा, विमान, तकनीक और अन्य उत्पाद खरीदने का इरादा जताया था।
रूस से तेल खरीद बना बड़ा पेच
रूस से भारत की ऊर्जा खरीद भी बातचीत में संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। फरवरी में अमेरिका ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ को हटाने का फैसला भारत की रूसी तेल खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता से जोड़ा था। इसके बाद रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव और बढ़ा है। नए अमेरिकी कानून में ऐसे देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत के लिए इससे भविष्य के अमेरिकी टैरिफ को लेकर
अनिश्चितता बढ़ी है।
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FEMA और निवेश नियमों पर भी सवाल
ट्रेड डील में निवेश और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े नियम भी चर्चा का हिस्सा हैं। अमेरिकी पक्ष भारत के कुछ विदेशी निवेश और विदेशी मुद्रा नियमों को लेकर सवाल उठाता रहा है। खास तौर पर FEMA से जुड़े प्रावधानों और विदेशी निवेशकों के लिए बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। अमेरिकी पक्ष विदेशी बैंकों से जुड़े कर नियमों को लेकर भी चिंताएं जता चुका है।
Section 301 से बढ़ी टैरिफ की चिंता
अमेरिका की Section 301 प्रक्रिया भी बातचीत को जटिल बना रही है। जुलाई 2026 में USTR ने जबरन श्रम से जुड़े मामलों की जांच के तहत भारत पर अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क तय किया था, जो शुरुआती 12.5 फीसदी प्रस्ताव से कम था। वहीं मौजूदा व्यापार वार्ता में औद्योगिक क्षमता, बाजार पहुंच और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े दूसरे मुद्दे भी लंबित हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रहने के बावजूद अंतिम समझौते की तारीख अभी स्पष्ट नहीं है।