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India-US trade: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर टैरिफ दर दोगुनी कर दी है, जिससे यह 50% तक पहुंच गया है। इस फैसले के बावजूद भारत इस महीने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के प्रति आशावादी है, क्योंकि अतिरिक्त 25% शुल्क लागू होने में अभी समय है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 25 से 30 अगस्त के बीच भारत का दौरा करेगा। हालांकि, ट्रंप ने संकेत दिया है कि जब तक टैरिफ संबंधी मुद्दे हल नहीं होते, तब तक वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह कृषि और डेयरी सेक्टर में कोई समझौता नहीं करेगा।
कृषि-डेयरी में भारत का कड़ा रुख
अमेरिका मक्का, सोयाबीन, सेब, बादाम, इथेनॉल और डेयरी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में अधिक पहुंच चाहता है, लेकिन भारत इन मांगों का विरोध कर रहा है, क्योंकि इससे किसानों और डेयरी उद्योग पर सीधा असर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि किसानों, डेयरी किसानों और मछुआरों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और इन पर समझौता नहीं होगा। इस बीच, सरकार ने निर्यातकों को राहत देने के लिए तीन-स्तरीय रणनीति तैयार की है, जिसमें प्रभावित क्षेत्रों के लिए कस्टमाइज स्कीम, वैकल्पिक बाजार तलाशना और घटते निर्यात ऑर्डरों को घरेलू जरूरतों के लिए मोड़ना शामिल है।
कौन से उत्पाद पर कितना टैरिफ
नई टैरिफ दरों के तहत स्मार्टफोन और दवाओं को छूट की सूची में रखा गया है, यानी इन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। लेकिन हीरे और सोने के उत्पादों पर 52.1%, मशीनरी और मैकेनिकल उपकरणों पर 51.3%, स्टील, एल्यूमीनियम और तांबे पर 51.7% और कालीनों पर 52.9% टैरिफ लगाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में वैकल्पिक निर्यात बाजार और घरेलू खपत बढ़ाकर बढ़े हुए टैरिफ के असर को कम किया जा सकता है।