भारत ने दुनिया के बड़े मंच पर एक खास उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के सचिव विवेक अग्रवाल को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ का उपाध्यक्ष चुना गया है। यह पहली बार है जब भारत को इस संस्था में उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली है। एफएटीएफ दुनिया भर में काले धन, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के लिए होने वाली फंडिंग रोकने के नियम तय करता है। भारत साल 2010 से इस संस्था का सदस्य है। अब विवेक अग्रवाल की नियुक्ति को दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत और भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है।
पेरिस बैठक में हुआ फैसला
विवेक अग्रवाल को यह जिम्मेदारी एफएटीएफ की पेरिस में हुई बैठक के बाद दी गई। संस्था के मुख्यालय में हुई इस बैठक में सदस्य देशों ने कई अहम फैसले लिए। इसी दौरान भारत के विवेक अग्रवाल को जुलाई 2026 से जून 2027 तक के लिए उपाध्यक्ष चुना गया। वह ब्रिटेन के जाइल्स थॉमसन की जगह लेंगे। थॉमसन एक जुलाई 2025 से इस पद पर थे। इस फैसले के बाद भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी जिम्मेदारी शुरू हो गई है। आने वाले एक साल में विवेक अग्रवाल दुनिया के कई देशों के साथ मिलकर अहम काम करेंगे।
कौन हैं विवेक अग्रवाल
विवेक अग्रवाल मध्य प्रदेश कैडर के 1994 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह भारत सरकार में सचिव के पद पर काम कर रहे हैं। उन्हें वित्त और कानून से जुड़े मामलों का लंबा अनुभव है। विवेक अग्रवाल पहले एफएटीएफ में भारत के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख भी रह चुके हैं। वह फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट इंडिया यानी एफआईयू-इंड के निदेशक भी रह चुके हैं। इस काम के दौरान उन्होंने संदिग्ध पैसों के लेनदेन और गैरकानूनी फंडिंग से जुड़े मामलों पर काम किया। इसी अनुभव के कारण उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी मिली है।
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क्या काम करती है एफएटीएफ
एफएटीएफ एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो गैरकानूनी पैसों के खेल को रोकने के लिए काम करती है। यह संस्था मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के लिए पैसे जुटाने और गलत तरीके से धन भेजने पर नजर रखती है। एफएटीएफ सदस्य देशों के लिए नियम और तरीके तय करता है। अगर कोई देश इन नियमों को सही से लागू नहीं करता तो उसके खिलाफ कड़ी नजर रखी जा सकती है। संस्था की ग्रे लिस्ट और ब्लैक लिस्ट को दुनिया भर में बहुत अहम माना जाता है। इसलिए एफएटीएफ में भारत को मिली यह जिम्मेदारी काफी खास है।
आतंकवाद के खिलाफ मजबूत संदेश
भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात करता रहा है। भारत का कहना है कि आतंकवाद फैलाने वालों तक पहुंचने वाला पैसा रोकना बहुत जरूरी है। विवेक अग्रवाल की नियुक्ति से भारत को इस मुद्दे पर दुनिया के सामने अपनी बात और मजबूती से रखने का मौका मिलेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इसे भारत की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को यह नई जिम्मेदारी और मजबूत करेगी। इससे आतंकवादी फंडिंग नेटवर्क पर कार्रवाई में भारत की आवाज ज्यादा असरदार होगी।
दुनिया में बढ़ेगा भारत का असर
विवेक अग्रवाल की नियुक्ति को भारत के लिए सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी दोनों माना जा रहा है। एफएटीएफ जैसे बड़े मंच पर भारत की भूमिका बढ़ने से दुनिया के कई अहम फैसलों में भारत का असर भी बढ़ेगा। भारत अब सिर्फ नियम मानने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि नियम बनाने और उन्हें लागू कराने में भी अहम भूमिका निभाएगा। यह जिम्मेदारी भारत को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में आगे रखेगी। आने वाले समय में विवेक अग्रवाल के फैसलों और भारत की भूमिका पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।