भारत में विमानन नियमों को और कड़ा करते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने विदेशी एयरलाइंस के लिए नई गाइडलाइन लागू कर दी है। अब अगर कोई एयरलाइन सुरक्षा मानकों या नियमों का पालन नहीं करती है, तो उसका परमिट निलंबित या रद्द किया जा सकता है। यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा और बेहतर सेवा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
लोकल प्रतिनिधि बनाना हुआ अनिवार्य
नए नियमों के तहत हर विदेशी एयरलाइन को भारत में एक स्थानीय प्रतिनिधि नियुक्त करना होगा। यह प्रतिनिधि सीधे डीजीसीए के साथ समन्वय करेगा और सभी जरूरी जानकारी साझा करेगा। इससे नियामक एजेंसी को एयरलाइंस की गतिविधियों पर सीधी नजर रखने में मदद मिलेगी और जवाबदेही भी तय होगी।
शिकायतों पर अब लापरवाही नहीं चलेगी
पहले विदेशी एयरलाइंस पर यात्री शिकायतों को लेकर नियंत्रण सीमित था, लेकिन अब उन्हें एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली बनानी होगी। हर शिकायत का रिकॉर्ड रखना होगा और समय-समय पर इसकी रिपोर्ट डीजीसीए को देनी होगी। अगर शिकायतों को नजरअंदाज किया गया, तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
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नियम तोड़े तो तुरंत कार्रवाई
यदि कोई एयरलाइन सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करती है या नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसका संचालन अधिकार तुरंत रोका जा सकता है। इसके अलावा अगर कोई एयरलाइन लगातार चार ट्रैफिक सीजन तक भारत के किसी एयरपोर्ट से उड़ान नहीं चलाती है, तो उसका परमिट अपने आप निलंबित माना जाएगा। अतिरिक्त उड़ानों के लिए भी अब कम से कम सात कार्य दिवस पहले अनुमति लेना जरूरी होगा।
क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का विमानन क्षेत्र तेजी से मजबूत हो रहा है। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी कंपनियां अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं। ऐसे में भारत अब विदेशी एयरलाइंस पर निर्भरता कम करते हुए अपने नियमों को सख्त बना रहा है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा और अधिकारों से कोई समझौता न हो।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा
इन नए नियमों का सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा। अब उन्हें बेहतर सेवा, समय पर शिकायतों का समाधान और सुरक्षित यात्रा का भरोसा मिलेगा। साथ ही एयरलाइंस को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, क्योंकि किसी भी तरह की लापरवाही अब भारी पड़ सकती है।