भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए इन्हें व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि दोनों देश रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, पारंपरिक चिकित्सा, पर्यटन और सांस्कृतिक संबंधों समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेंगे। ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों की मजबूत नींव साझा विरासत में निहित है। उन्होंने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान मिलकर उज्बेकिस्तान में मौजूद बौद्ध विरासत स्थलों के संरक्षण के लिए काम करेंगे।
रिश्तों को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी
प्रधानमंत्री ने कहा, "आज हमने अपने साझा विरासत के संबंधों को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। हम उज्बेकिस्तान के बौद्ध हेरिटेज साइट्स के संरक्षण के लिए मिलकर काम करेंगे।" उन्होंने दोनों देशों के युवाओं, विशेषकर विद्यार्थियों और पेशेवरों के बीच संपर्क और आदान-प्रदान को प्राथमिकता देने की बात कही। मोदी ने कहा कि युवाओं के बीच बढ़ते संपर्क से भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।
छात्रवृत्तियां भी प्रदान करेगा
पर्यटन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच 'प्रोग्राम ऑफ कोऑपरेशन' पर भी सहमति बनी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए छात्रवृत्तियां भी प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, "मुझे आज उज्बेकिस्तान में हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्तियों की घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है।"
दोनों देशों के बीच सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कृषि और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत और उज्बेकिस्तान की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं। उज्बेकिस्तान के बागवानी क्षेत्र के अनुभव और भारत की आधुनिक कृषि पद्धतियों को साथ लाकर दोनों देश अपनी खाद्य सुरक्षा को मजबूत कर सकते हैं। उज्बेकिस्तान की औषधीय जड़ी-बूटियां और भारत का आयुर्वेदिक ज्ञान दोनों देशों के बीच सहयोग का एक स्वाभाविक आधार है।
साझेदारी विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे
पीएम मोदी ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच हुआ समझौता इस दिशा में संयुक्त प्रयासों को और गति देगा। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-उज्बेकिस्तान साझेदारी केवल दोनों देशों की राजधानियों तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा, "दोनों देश अपने शहरों और राज्यों के बीच भी साझेदारी विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।"