India Women Compound Archery Gold : जापान के नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में भारत की महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया। ज्योति सुरेखा, तनिपार्थी चिकिता और प्रदीप प्रीतिका की तिकड़ी ने फाइनल मुकाबले में चीन को 238-234 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। सबसे खास बात यह रही कि भारतीय टीम ने 240 में से 238 अंक हासिल करते हुए दक्षिण कोरिया के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली। यह जीत सिर्फ एक मेडल नहीं बल्कि भारतीय महिला तीरंदाजी की ताकत का बड़ा संदेश मानी जा रही है।
क्वालिफिकेशन से फाइनल तक शानदार सफर
भारतीय टीम का सफर शुरुआत से ही दमदार रहा। क्वालिफिकेशन राउंड में भारत ने दूसरा स्थान हासिल किया था और टीम की स्टार खिलाड़ी चिकिता ने 705 अंकों के साथ व्यक्तिगत रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया। सेमीफाइनल में भारत का सामना मजबूत दक्षिण कोरिया से हुआ। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 235-233 से जीत दर्ज की। इसी जीत ने टीम का आत्मविश्वास बढ़ाया और फाइनल में चीन के खिलाफ भी भारतीय तीरंदाज पूरी तरह हावी नजर आईं।
स्विमर से आर्चरी स्टार बनीं ज्योति सुरेखा
भारतीय टीम की सबसे अनुभवी सदस्य ज्योति सुरेखा की कहानी भी प्रेरणा से भरी हुई है। कभी तैराकी में करियर बनाने का सपना देखने वाली ज्योति ने बाद में तीरंदाजी को चुना और लगातार मेहनत के दम पर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में जगह बनाई। वर्षों की मेहनत और अंतरराष्ट्रीय अनुभव का फायदा टीम को फाइनल में भी मिला। कठिन परिस्थितियों में शांत रहकर निशाना लगाने की उनकी क्षमता भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।
किसान की बेटी चिकिता ने दिखाया दम
तेलंगाना के किसान परिवार से आने वाली 21 वर्षीय तनिपार्थी चिकिता आज देश की नई खेल स्टार बन चुकी हैं। उनके पिता ने बचपन में अखबार में तीरंदाजी की खबर पढ़कर उन्हें इस खेल की ओर बढ़ाया था। दूसरी कक्षा से शुरू हुआ सफर अब एशियन गेम्स के गोल्ड तक पहुंच चुका है। 2025 वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली चिकिता लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रही हैं और अब एशियन गेम्स का गोल्ड उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है।
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18 साल की प्रीतिका बनीं नई सनसनी
महाराष्ट्र की रहने वाली प्रदीप प्रीतिका ने महज 18 साल की उम्र में बड़ा कारनामा कर दिखाया है। कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपना 18वां जन्मदिन मनाया था और अब देश के लिए गोल्ड जीतकर सुर्खियों में हैं। पांचवीं कक्षा में शुरू हुई उनकी तीरंदाजी की यात्रा आज एशियन गेम्स के मंच तक पहुंच गई है। लगातार अंतरराष्ट्रीय मेडल जीतने वाली प्रीतिका को भारतीय तीरंदाजी का भविष्य माना जा रहा है। ज्योति के अनुभव, चिकिता की सटीकता और प्रीतिका के जोश ने मिलकर भारत को ऐसा गोल्ड दिलाया जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी।