भारतीय वायुसेना की ताकत को बढ़ाने के लिए दो बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। देश का पहला स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस Mark-1A का उत्पादन शुरू हो चुका है, वहीं 114 स्वदेशी राफेल फाइटर जेट्स की भी डील जल्द पूरी होने वाली है। मिग-21 जैसे पुराने विमान धीरे-धीरे रिटायर हो रहे हैं। नए हल्के और उन्नत फाइटर जेट्स से चीन-पाकिस्तान के खिलाफ रणनीतिक बढ़त हासिल होगी, साथ ही आत्मनिर्भरता और रक्षा क्षेत्र में मजबूती आएगी।
तेजस Mark-1A से एयरफोर्स को मिलेगी ताकत
तेजस Mark-1A भारत का पहला स्वदेशी हल्का मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित किया गया है। इसमें AESA रडार, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, Astra BVR और ASRAAM मिसाइलें हैं। हल्के पेलोड के बावजूद इसकी गति Mach 1.6 तक है। पहले 83 जेट्स के लिए 48,000 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट हुआ था, वहीं अगस्त 2025 में 97 और जेट्स के लिए 62,000 करोड़ रुपये का समझौता हुआ। कुल मिलाकर 180 तेजस Mk1A जेट्स बनेंगे, जो 10 स्क्वाड्रन तैयार करेंगे। उत्पादन क्षमता नासिक फैसिलिटी से हर साल 24 जेट्स की होगी।
स्वदेशी राफेल से ताकत का विस्तार
स्वदेशी राफेल डील में फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (TASL) साझेदारी से 114 जेट्स बनाए जाएंगे। इनमें 70% से अधिक स्वदेशी सामग्री होगी। राफेल में दो इंजन (M88), 1.8 Mach स्पीड, RBE2 AESA रडार, SPECTRA EW सिस्टम, SCALP क्रूज मिसाइल और MICA एयर-टू-एयर मिसाइलें शामिल हैं। इससे IAF को 6-7 अतिरिक्त स्क्वाड्रन मिलेंगे। ऑपरेशन सिंदूर में राफेल ने चीनी PL-15 मिसाइल को मात दी थी। नए राफेल मिसाइल सिस्टम और ब्रह्मोस-एनजी जैसी भारतीय मिसाइलें भी इसमें इंटीग्रेट की जाएंगी।
भविष्य की तैयारी और रणनीतिक बढ़त
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि आवश्यकतानुसार 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए। तेजस Mark-1A और स्वदेशी राफेल से आने वाले नए स्क्वाड्रन से यह संख्या तेजी से बढ़ेगी। 2035 तक IAF के पास 350+ आधुनिक जेट्स होंगे। इससे न सिर्फ संख्या में मजबूती आएगी, बल्कि तकनीकी रूप से भी वायुसेना चीन और पाकिस्तान के खिलाफ श्रेष्ठ स्थिति में होगी। स्वदेशी उत्पादन से आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और रक्षा क्षेत्र में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।