Indian Car Buyers
: भारतीय कार बाजार में इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब कार खरीदते समय लोग सिर्फ पेट्रोल मॉडल पर निर्भर नहीं रहना चाहते। अगस्त 2026 में सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों की कुल हिस्सेदारी 42% तक पहुंच गई, जबकि पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी 41% रह गई। पहली बार इन विकल्पों ने पेट्रोल को पीछे छोड़ा है।
पेट्रोल की हिस्सेदारी क्यों घटी?
पेट्रोल कारों की बिक्री खत्म नहीं हुई है, लेकिन खरीदारों के पास अब पहले से ज्यादा विकल्प हैं। अगस्त में पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी एक साल पहले के 46% से घटकर 41% रह गई। बढ़ती ईंधन लागत और भविष्य में पेट्रोल से जुड़ी तकनीक को लेकर लोगों की सोच में बदलाव इसका एक कारण माना जा रहा है।
सीएनजी बनी लोगों की पसंद
सीएनजी कारों ने इस बदलाव में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। अगस्त में सीएनजी कारों की हिस्सेदारी 25% तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 21% थी। कम चलने का खर्च और कई शहरों में सीएनजी भरवाने की बढ़ती सुविधा के कारण लोग इसे पेट्रोल का आसान विकल्प मान रहे हैं।
हाइब्रिड कारों ने भी बढ़ाई पकड़
हाइब्रिड कार उन लोगों के लिए आकर्षक विकल्प बन रही हैं जो पेट्रोल कार जैसा अनुभव चाहते हैं, लेकिन ईंधन खर्च कम रखना चाहते हैं। इनमें पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक तकनीक भी काम करती है। यही वजह है कि कई खरीदार पूरी तरह इलेक्ट्रिक कार लेने से पहले हाइब्रिड को बीच का रास्ता मान रहे हैं।
ईवी को लेकर बढ़ा भरोसा
इलेक्ट्रिक कारों की मांग भी लगातार बढ़ रही है। अगस्त में ईवी की बिक्री सालाना आधार पर करीब 52% बढ़कर 30,700 यूनिट पहुंच गई। कुल यात्री वाहन बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी 7.7% रही, जो पिछले साल 5.9% थी।
आगे और बदल सकता है कार बाजार
इस बदलाव से साफ है कि भारतीय ग्राहक अब कार खरीदते समय सिर्फ कीमत और डिजाइन नहीं देख रहा। वह चलाने का खर्च, ईंधन की उपलब्धता, नई तकनीक और आने वाले वर्षों में कार की उपयोगिता पर भी ध्यान दे रहा है। हालांकि पेट्रोल कारें अभी भी बाजार का बड़ा हिस्सा हैं, लेकिन सीएनजी, हाइब्रिड और ईवी की बढ़ती मांग कंपनियों के लिए बड़ा संकेत है। आने वाले समय में नए मॉडल भी इन्हीं विकल्पों को ध्यान में रखकर बाजार में उतारे जा सकते हैं।