शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में दिखाई दिया। इसकी बड़ी वजह दुनिया की दिग्गज टेक और कंसल्टिंग कंपनी एक्सेंचर का नया अनुमान रहा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने राजस्व वृद्धि अनुमान को घटा दिया। पहले जहां कंपनी 3 से 5 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद जता रही थी, वहीं अब इसे 3 से 4 प्रतिशत के बीच बताया गया है। एक्सेंचर को वैश्विक आईटी उद्योग का बड़ा संकेतक माना जाता है, इसलिए उसके इस फैसले ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
इंफोसिस से लेकर टीसीएस तक सब पर असर
एक्सेंचर की घोषणा के बाद भारतीय आईटी शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई। निफ्टी आईटी सूचकांक में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा दबाव इंफोसिस के शेयर पर देखने को मिला, जिसमें करीब 8 प्रतिशत तक गिरावट आई। इसके अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, एमफैसिस और एलटीआई माइंडट्री जैसे बड़े शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। निवेशकों को डर है कि अगर वैश्विक कंपनियां तकनीक पर खर्च कम करेंगी तो भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई भी प्रभावित होगी।
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कुछ ही घंटों में डूब गई बड़ी रकम
बाजार खुलते ही निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई और आईटी शेयरों में बिकवाली तेज हो गई। इसका असर यह हुआ कि कुछ ही समय में निवेशकों की करीब 2 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बढ़ते प्रभाव और तकनीकी खर्च में कटौती की आशंका ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह रही कि भारतीय आईटी कंपनियों से जुड़े विदेशी निवेश साधनों में भी पहले से कमजोरी देखने को मिल रही थी।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर दुनिया की बड़ी तकनीकी कंपनियों के नतीजों और उनके खर्च पर रहेगी। अगर वैश्विक स्तर पर तकनीकी निवेश में और कमी आती है तो भारतीय आईटी कंपनियों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि जानकारों का कहना है कि यह घबराने का नहीं बल्कि सतर्क रहने का समय है। फिलहाल इतना तय है कि एक्सेंचर के एक फैसले ने भारतीय आईटी सेक्टर को बड़ा झटका दिया है और शेयर बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।