Indian Navy on High Alert: मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर हवाई और समुद्री यातायात पर पड़ रहा है। कई उड़ानें रद्द होने से भारतीय नागरिक विभिन्न देशों में फंसे हुए हैं। भारत सरकार विशेष उड़ानों के जरिए उन्हें सुरक्षित वापस लाने की कोशिश कर रही है। इसी बीच भारतीय नौसेना भी संभावित राहत और निकासी अभियान के लिए पूरी तरह तैयार है। ओमान की खाड़ी में तैनात INS सूरत हालात बिगड़ने पर अहम भूमिका निभा सकता है।
ओमान की खाड़ी
सूत्रों के अनुसार गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर INS सूरत को एहतियातन ओमान की खाड़ी के पास तैनात किया गया है। जरूरत पड़ने पर यह युद्धपोत फंसे भारतीयों की निकासी में शामिल हो सकता है। आधुनिक तकनीक से लैस यह पोत दुश्मन के रडार से बचते हुए संचालन करने में सक्षम है और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से सुसज्जित है।
तेज रफ्तार क्षमता
करीब 163 मीटर लंबा और लगभग 7400 टन वजनी यह युद्धपोत 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है। इसमें गैस टर्बाइन इंजन, उन्नत सर्विलांस रडार, पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो लॉन्चर लगे हैं। आवश्यकता पड़ने पर अदन की खाड़ी में मौजूद अन्य भारतीय पोतों को भी शीघ्र तैनात किया जा सकता है।
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वैश्विक मौजूदगी
भारतीय नौसेना ने 2017 में मिशन डेप्लॉयमेंट की शुरुआत की थी। इसके तहत स्ट्रेट ऑफ होरमुज, ओमान की खाड़ी, अदन की खाड़ी, सेशेल्स और अंडमान-निकोबार क्षेत्र जैसे अहम समुद्री इलाकों में लगातार तैनाती रखी जाती है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव हो।
नागरिक सुरक्षा प्राथमिकता
अदन की खाड़ी और स्वेज मार्ग भारत के व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। किसी भी व्यवधान से समय और लागत बढ़ सकती है। ऐसे में नौसेना की सतर्क तैनाती का उद्देश्य न केवल समुद्री व्यापार की सुरक्षा है, बल्कि संकट की घड़ी में भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालना भी है।