Indian-Origin Businessman Sentenced: अमेरिका में भारतीय मूल के वित्तीय कारोबारी सिद्धार्थ जवाहर को निवेशकों के साथ करोड़ों डॉलर की धोखाधड़ी के मामले में 11 साल जेल की सजा सुनाई गई है। अमेरिकी अदालत के दस्तावेजों के मुताबिक, जवाहर ने एक बड़ी पोंजी स्कीम के जरिए करीब 3.5 करोड़ डॉलर यानी लगभग 336 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की। इस मामले में कुल 64 निवेशकों को नुकसान हुआ। इनमें अमेरिकी फुटबॉल खिलाड़ी ट्रैविस केल्से का नाम भी शामिल है। अदालत ने जवाहर को निवेशकों को करीब 3.13 करोड़ डॉलर वापस करने का आदेश भी दिया है।
स्विफ्टआर्क कैपिटल से जुड़ा था मामला
38 वर्षीय सिद्धार्थ जवाहर टेक्सास स्थित निवेश कंपनी स्विफ्टआर्क कैपिटल के सह-संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर थे। ट्रैविस केल्से भी इस कंपनी में निवेश करने वाले लोगों में शामिल थे। अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, कंपनी से जुड़ी कथित धोखाधड़ी वर्ष 2016 से चल रही थी और दिसंबर 2023 तक निवेशकों से रकम जुटाने का सिलसिला जारी रहा। अदालत ने मामले में हुए भारी वित्तीय नुकसान और लंबे समय तक चले धोखाधड़ी के आधार पर सजा तय की।
निवेशकों को क्या बताया गया?
अदालत के मुताबिक, जवाहर ने निवेशकों से जुटाई गई बड़ी रकम को फिलिप मॉरिस पाकिस्तान में निवेश किया। जब इस निवेश की कीमत में गिरावट आने लगी तो निवेशकों को वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं दी गई। इसके बजाय उन्हें निवेश पर मुनाफा होने की बात बताई गई। कुछ निवेशकों को यह भी बताया गया कि उनका पैसा अलग-अलग जगहों पर लगाया गया है और वहां से रिटर्न मिल रहा है, जबकि अभियोजन के अनुसार वास्तविकता इससे अलग थी।
महंगे शौक पर खर्च की रकम
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, जुलाई 2016 से दिसंबर 2023 के बीच स्विफ्टआर्क से 3.5 करोड़ डॉलर से अधिक की रकम ली गई। इसमें से लगभग 1 करोड़ डॉलर ही निवेश किया गया, जबकि बाकी रकम का इस्तेमाल निजी खर्चों में किया गया। आरोपों के अनुसार, इस पैसे से प्राइवेट जेट, महंगे होटल, टेक्सास और न्यूयॉर्क में लग्जरी अपार्टमेंट, महंगे कपड़े और भोजन तथा निजी क्लबों की सदस्यता जैसी चीजों पर खर्च किया गया।
तीन मामलों में कबूला अपराध
सिद्धार्थ जवाहर ने जनवरी में वायर फ्रॉड से जुड़े तीन मामलों में अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। अदालत के दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि वह मूल रूप से भारत का रहने वाला है और 2005 से अमेरिका में अवैध रूप से रह रहा था। रिपोर्टों के मुताबिक, मिसौरी से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य सैम ग्रेव्स ने संघीय जज को पत्र लिखकर सजा के दौरान जवाहर के मामले में नरमी बरतने का अनुरोध किया था। अदालत ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद 11 वर्ष की जेल की सजा सुनाई।