दीपावली से पहले रेलवे यात्रियों को झटका लगा है। रतलाम मंडल के उज्जैन जंक्शन पर यार्ड रिमॉडलिंग और नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के चलते 15 अक्टूबर तक ट्रेनों की आवाजाही लगभग ठप रहेगी। स्टेशन पर सन्नाटा पसरा है, जबकि हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हो चुकी हैं। रेलवे ने जहां कई ट्रेनों को निरस्त किया है, वहीं सात प्रमुख ट्रेनों के रूट में बदलाव किया गया है। यह काम उज्जैन यार्ड के आधुनिकीकरण और नेटवर्क सुधार के तहत किया जा रहा है।
उज्जैन स्टेशन पर सन्नाटा, दीपावली यात्रियों की बढ़ी चिंता
उज्जैन जंक्शन, जो रतलाम मंडल का अहम रेलवे स्टेशन है, इन दिनों पूरी तरह शांत नजर आ रहा है। यार्ड रिमॉडलिंग कार्य के चलते अधिकांश ट्रेनों का संचालन रोक दिया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह काम ट्रैक लेआउट और सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए किया जा रहा है। लेकिन यात्रियों की परेशानी यह है कि दीपावली से पहले घर लौटने का सपना अधूरा न रह जाए।
15 अक्टूबर तक ठप रहेगा संचालन
रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी खेमराज मीना ने बताया कि नॉन-इंटरलॉकिंग और ब्लॉक कार्य के कारण ट्रेनों की आवाजाही पर रोक रहेगी। उन्होंने कहा कि यात्रियों को यात्रा से पहले NTES ऐप, रेलवे हेल्पलाइन या वेबसाइट पर गाड़ियों की स्थिति जांचने की सलाह दी गई है। इस दौरान स्टेशन पर केवल मेंटेनेंस और तकनीकी कर्मचारी ही मौजूद रहेंगे।
सात प्रमुख ट्रेनों का रूट बदला
रेलवे ने रिमॉडलिंग कार्य के दौरान सात ट्रेनों का मार्ग परिवर्तित किया है ताकि यात्रियों को सीमित असुविधा हो। इनमें प्रमुख ट्रेनें हैं —
बीकानेर–साईनगर शिरडी स्पेशल (04715): अब सवाई माधोपुर–गुड़ला–सोगरिया–गुना–बीना–भोपाल मार्ग से चलेगी।
भगत की कोठी–बिलासपुर एक्सप्रेस (20844) और बीकानेर–बिलासपुर एक्सप्रेस (20846) का भी यही रूट होगा।
साईनगर शिरडी–बीकानेर स्पेशल (04716): भोपाल–बीना–गुना–कोटा होकर चलेगी।
बिलासपुर–भगत की कोठी एक्सप्रेस (20843) और बिलासपुर–बीकानेर एक्सप्रेस (20845) भी वैकल्पिक मार्ग से चलेंगी।
रक्सौल–वटवा स्पेशल (05561) का रूट दमोह–गुना–कोटा–रतलाम किया गया है।
रेलवे modernization का बड़ा कदम
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह ब्लॉक उज्जैन यार्ड के पुनर्निर्माण के लिए जरूरी था। नए ट्रैक लेआउट और सिग्नलिंग सिस्टम के बाद यहां से गुजरने वाली ट्रेनों की गति और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा। यह प्रोजेक्ट पश्चिम रेलवे के नेटवर्क सुधार अभियान का हिस्सा है।