Railway Electrification India : भारतीय रेलवे अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क को पूरी तरह बिजली से चलाने के लक्ष्य के करीब पहुंच गया है। देश में रेलवे लाइनों के विद्युतीकरण का काम लगभग पूरा हो चुका है और अब सिर्फ 191 रूट किलोमीटर रेलखंड पर काम बाकी बताया जा रहा है। इस लक्ष्य के पूरा होने से ट्रेनों के संचालन में डीजल पर निर्भरता और कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, 100 प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य पूरा होने तक बचे हुए रेलखंडों पर काम पूरा करना जरूरी है।
सिर्फ 191 किलोमीटर ट्रैक बाकी
भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क में अब केवल 191 रूट किलोमीटर का विद्युतीकरण बाकी है। ये रेलखंड तीन राज्यों में स्थित हैं। विद्युतीकरण के तहत रेलवे ट्रैक के ऊपर बिजली की लाइनें लगाई जाती हैं, जिससे बिजली से चलने वाले इंजन ट्रेनों को खींच सकें। रेलवे लंबे समय से इस दिशा में काम कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक रेल मार्गों पर बिजली से ट्रेनें चलाई जा सकें।
डीजल की खपत में आई बड़ी गिरावट
रेलवे में बिजली से चलने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ने का असर डीजल की खपत पर भी पड़ा है। रेल मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2015-16 में ट्रेनों के संचालन के लिए करीब 293 करोड़ लीटर डीजल इस्तेमाल हुआ था। वित्त वर्ष 2024-25 में यह मात्रा घटकर लगभग 108 करोड़ लीटर रह गई। इससे रेलवे को डीजल पर निर्भरता कम करने और ईंधन खर्च नियंत्रित करने में मदद मिली है।
ये भी पढ़ें : प्याज से LPG तक महंगाई की मार, घर में खाना बनाना 10% तक महंगा; जानें वजह
बिजली से चलने वाली ट्रेनें क्यों अहम
डीजल इंजन चलने के दौरान धुआं छोड़ते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर वायु प्रदूषण बढ़ सकता है। इसके मुकाबले बिजली से चलने वाली ट्रेनें अपने संचालन के दौरान सीधे धुआं नहीं छोड़तीं। इससे रेलवे स्टेशनों, रेल मार्गों और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले स्रोतों को ध्यान में रखना भी जरूरी है, क्योंकि पर्यावरण को होने वाला कुल लाभ इस पर निर्भर करता है।
100% विद्युतीकरण से क्या बदलेगा
रेलवे के पूरे ब्रॉड गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण होने से बिजली से चलने वाली ट्रेनों के संचालन का दायरा और बढ़ सकता है। इससे डीजल की खरीद और ढुलाई पर निर्भरता कम करने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और रेल परिवहन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी। अब रेलवे का ध्यान बचे हुए 191 रूट किलोमीटर पर काम पूरा करने पर है। इसके बाद भी पूरे नेटवर्क में संचालन, रखरखाव और वैकल्पिक व्यवस्था से जुड़े पहलुओं का महत्व बना रहेगा।