indian railways hydro रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब ट्रेनें नदी के पानी से बनने वाली हाइड्रो बिजली से चलेंगी। उत्तर रेलवे ने 400 मेगावाट जल विद्युत ऊर्जा खरीदने के लिए एक अहम समझौता किया है, जिससे हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। इस कदम से रेलवे की सस्ती, टिकाऊ और प्रदूषण मुक्त ऊर्जा की ओर मजबूती से बढ़ोतरी होगी, जो आने वाले वर्षों में पूरे देश के लिए एक उदाहरण बनेगा।
जल विद्युत से हरित ऊर्जा का निर्माण
उत्तर रेलवे ने एक बड़ी पहल के तहत जल विद्युत ऊर्जा की आपूर्ति के लिए एक करार किया है, जिससे नदी के पानी से बिजली बनाकर ट्रेनों को ऊर्जा दी जाएगी। यह बिजली अरुणाचल प्रदेश में बन रहे 1200 मेगावाट क्षमता वाले कलाई-II हाइड्रो प्रोजेक्ट से मिलेगी।
पर्यावरण संरक्षण और कम ऊर्जा लागत
इस योजना से रेलवे को कोयले और डीजल जैसे प्रदूषणकारी ईंधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे न केवल पर्यावरण साफ रहेगा, बल्कि रेलवे की ऊर्जा लागत भी कम होगी। इसका सीधा लाभ रेल यात्रियों को मिलेगा।
स्थानीय रोजगार और हरित भविष्य
हाइड्रो प्रोजेक्ट से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके निर्माण और रखरखाव में स्थानीय लोगों को काम मिलेगा। साथ ही, 2030 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को पाने में भी यह कदम मददगार होगा।