
इंडियन करेंसी पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है क्योंकि हफ्ते के पहले कारोबारी दिन करुपये की शुरुआत कमजोर रही. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 88.73 प्रति डॉलर पर खुला और जल्द ही 88.77 के स्तर तक गिर गया. ये पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले 7 पैसे की गिरावट है. लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों ने रुपये की कमजोरी को और गहरा दिया है. वहीं, डॉलर इंडेक्स जो डॉलर की मजबूती मापता है वो भी मामूली गिरावट के बावजूद मजबूत स्थिति में बना हुआ है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से टूटा भरोसा
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने न केवल रुपया बल्कि भारतीय शेयर बाजार को भी हिला दिया है. शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 6,769 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे मार्केट में नेगेटिव सेंटीमेंट बन गया. बीएसई सेंसेक्स 258 अंक गिरकर 83,679.88 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी-50 में भी 47.95 अंकों की गिरावट दर्ज की गई. एनालिस्ट्स का कहना है कि अमेरिका की मजबूत अर्थव्यवस्था, ऊंची ब्याज दरें और डॉलर की बढ़ती मांग के कारण निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। यह पूंजी बहिर्गमन रुपये को और कमजोर बना रहा है.
बढ़ा क्रूड ऑयल का बोझ
रुपये पर दबाव की एक बड़ी वजह क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें भी हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.31% बढ़कर 64.97 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है. भारत अपने तेल की जरूरत का लगभग 85% आयात करता है, इसलिए जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो देश का आयात बिल बढ़ जाता है और डॉलर की मांग में उछाल आता है. इसका सीधा असर रुपये पर पड़ता है. वहीं, निर्यात में अपेक्षित तेजी न आने के कारण व्यापार घाटा और बढ़ रहा है.
विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट
रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश का विदेशी मुद्रा भंडार 6.92 अरब डॉलर घटकर 695.35 अरब डॉलर रह गया है. इससे पहले वाले हफ्ते में इसमें मामूली सुधार देखने को मिला था, लेकिन अब फिर से गिरावट दर्ज की गई है. आरबीआई के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले यूरो, येन और पाउंड जैसी मुद्राओं की वैल्यू में कमी ने भी भंडार को प्रभावित किया है. वहीं, स्वर्ण भंडार का मूल्य भी घटकर 105.53 अरब डॉलर रह गया है. आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले दिनों में रुपया और दबाव में आ सकता है. फिलहाल, बाजार की नजर अब आरबीआई के कदमों पर है, जो मुद्रा स्थिरता के लिए आगे की रणनीति तय करेगा.