भारतीय रुपया बुधवार को फिसलकर अब तक के सबसे निचले स्तर 90 प्रति डॉलर पर पहुंच गया है. पिछले कुछ दिनों में भारतीय रुपये में लगातार गिरावट देखी जा रही थी. वहीं अब ये रिकॉर्ड लो-लेवल पर जा पहुंचा है. जहां एक तरफ रुपया गिरकर जमीन पर जा पहुंचा है, तो दूसरी ओर इस गिरावट के बाद भी केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) अनंत नागेश्वरन का कहना है कि 'रुपये में ये गिरावट चिंता की बात नहीं है.'
2025 में भारतीय करेंसी की वैल्यू 5.3 फीसदी गिरी
भारतीय रुपया हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को अपने पिछले बंद भाव के मुकाबले 89.96 रुपये पर खुला और लगातार बिकवाली के दबाव के कारण कुछ ही देर में गिरते हुए 90.15 प्रति डॉलर तक जा पहुंचा. यही नहीं दिन बढ़ने के साथ ही ये और भी गिरता चला गया और इंट्राडे कारोबार में 90.30 रुपये प्रति डॉलर पर अब तक के न्यूनतम स्तर तक लुढ़क गया. साल 2025 में अब तक भारतीय करेंसी की वैल्यू में करीब 5.3 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आ चुकी है.
'ये गिरावट किसी चिंता का विषय नहीं'
सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भारतीय करेंसी रुपये के भरभराकर टूटने के बीच बड़ी बात कही है. उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि 'रुपये के 90 प्रति डॉलर के पार निकल जाने से सरकार की नींद नहीं उड़ी है.' CEA ने आगे कहा कि करेंसी में गिरावट का महंगाई या निर्यात पर कोई विशेष असर नहीं पड़ा है. ऐसे में ये गिरावट कोई चिंता की बात नहीं है.
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CEA ने रुपये में अगले साल सुधार की कही बात
भारतीय रुपया गिरने को लेकर मार्केट एक्सपर्ट्स तमाम तरह के कारण बताते हुए इसके और गिरने की संभावना जता रहे हैं. बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस का कहना है कि FPI की बिकवाली, व्यापार घाटे में संभावित बढ़ोतरी और निर्यात में कमी का दबाव रुपये पर दिखाई दे रहा है. उन्होंने अलर्ट करते हुए कहा है कि ये निर्यातकों को भले ही फायदा हो, लेकिन यह आयातकों या महंगाई के लिए अच्छी खबर नहीं है. क्योंकि जब रुपया एक महत्वपूर्ण स्तर को पार कर जाता है और कुछ दिन वहां टिका रहता है, तो बाज़ार उसे 'नया बेंचमार्क' मान लेता है.
सबनवीस के अनुसार कारोबारियों के बीच अब रुपये के 91 प्रति डॉलर की ओर बढ़ने की चर्चाएं जोरों पर हैं लेकिन रिजर्व बैंक की पॉलिसी रेट्स पर ऐलान के बाद ऐसा हो सकता है कि भारतीय मुद्रा 88-89 के स्तर तक वापस आ जाए. वहीं दूसरी ओर CEA अनंत नागेश्वरन ने रुपये में हालिया उतार-चढ़ाव को स्वीकार तो कर लिया है लेकिन साथ ही ये भरोसा भी जताया है कि इसमें अगले साल सुधार आ सकता है.