केंद्रीय बजट से ठीक पहले संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश होने जा रहा था और इसी बीच भारतीय रुपये को बड़ा झटका लगा। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले टूटकर 92 के स्तर पर पहुंच गया। यह अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। इस साल अब तक रुपये में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में इस गिरावट ने निवेशकों और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि बजट से पहले ऐसी हलचल अच्छे संकेत नहीं मानी जाती।
डॉलर की मांग से बढ़ा दबाव
विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि डॉलर की लगातार मजबूत मांग रुपये पर भारी पड़ रही है। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 91.95 प्रति डॉलर पर खुला था लेकिन कुछ ही समय में यह फिसलकर 92 तक पहुंच गया। महीने के आखिर में आयातकों और बैंकों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर घरेलू मुद्रा पर पड़ता है। यही वजह है कि रुपया संभल नहीं सका।
वैश्विक माहौल ने भी बढ़ाई चिंता
वैश्विक स्तर पर चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों को सतर्क कर दिया है। जब दुनिया में तनाव बढ़ता है तो निवेशक जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित निवेश की ओर जाते हैं। ऐसे समय में डॉलर की मांग बढ़ती है और उभरते बाजारों की मुद्राएं कमजोर होती हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। हालांकि डॉलर इंडेक्स में हल्की नरमी दिखी, फिर भी रुपये पर दबाव बना रहा।
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पिछले दिनों से जारी है कमजोरी
रुपये की गिरावट अचानक नहीं आई है। इससे एक दिन पहले बुधवार को भी रुपया 31 पैसे टूटकर 91.99 के स्तर पर बंद हुआ था। इससे पहले 23 जनवरी को भी रुपया पहली बार 92 के करीब पहुंचा था। यानी पिछले कुछ दिनों से रुपये में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। बाजार मान रहा है कि जब तक वैश्विक हालात साफ नहीं होते, तब तक रुपये को राहत मिलना मुश्किल है।
शेयर बाजार भी नहीं बचा
रुपये की कमजोरी का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिखा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 343 अंक से ज्यादा गिरकर 82,001 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी करीब 94 अंक टूटकर 25,248 के स्तर पर आ गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे भारत जैसे आयातक देशों पर दबाव और बढ़ गया।
आगे क्या हो सकता है
विश्लेषकों का कहना है कि आर्थिक सर्वेक्षण और बजट के बाद बाजार को कुछ दिशा मिल सकती है। अगर सरकार विकास और निवेश को लेकर मजबूत संकेत देती है तो रुपये और शेयर बाजार दोनों को सहारा मिल सकता है। फिलहाल निवेशक सतर्क हैं और हर नजर बजट पर टिकी है। बड़ा सवाल यही है कि क्या बजट रुपये की गिरती हालत को थाम पाएगा या बाजार की चिंता और बढ़ेगी।