वैश्विक अस्थिरता और बाजार में बनी अनिश्चितता के बीच भारतीय रुपये ने मजबूत वापसी की है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में ही रुपये ने 12 पैसे की बढ़त दर्ज की और 90.66 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। हाल के दिनों में दबाव झेलने के बाद रुपये की यह तेजी बाजार के लिए राहत की खबर मानी जा रही है। जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की कमजोरी ने रुपये को सहारा दिया है।
डॉलर की कमजोरी बनी रुपये की ताकत
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के कमजोर रुख का सीधा फायदा रुपये को मिला। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति बताने वाला डॉलर इंडेक्स 0.21 प्रतिशत गिरकर 98.99 पर आ गया। डॉलर में आई इस नरमी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को राहत मिली और भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ। शुक्रवार को रुपया 90.78 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जबकि सोमवार को इसमें सुधार देखने को मिला।
ट्रंप के बयान से बदला माहौल
मुद्रा बाजार में हलचल की एक बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी माना जा रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर यूरोपीय देश ग्रीनलैंड को लेकर अपनी योजनाओं पर आगे बढ़ते हैं, तो उन पर टैरिफ लगाया जा सकता है। इस बयान के बाद डॉलर पर दबाव बढ़ा और निवेशकों ने डॉलर से दूरी बनानी शुरू की। इसी का असर यह हुआ कि रुपये जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को मजबूती मिली।
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कच्चा तेल और भू-राजनीति बनी चिंता
हालांकि रुपये की मजबूती के बावजूद कुछ चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 64.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। इसके अलावा भू-राजनीतिक हालात और वैश्विक तनाव भी निवेशकों को सतर्क बनाए हुए हैं, जिससे मुद्रा बाजार में उतार चढ़ाव की आशंका बनी रहती है।
शेयर बाजार की कमजोरी का असर
घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 482 अंक से ज्यादा टूटकर 83,087 के स्तर पर आ गया। वहीं एनएसई निफ्टी भी 129 अंक फिसलकर 25,565 पर पहुंच गया। बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का भी असर दिखा। आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एक ही दिन में हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।
आगे रुपये की चाल पर नजर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की दिशा पूरी तरह वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। डॉलर की चाल, कच्चे तेल के दाम, विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय राजनीति रुपये की मजबूती या कमजोरी तय करेंगे। फिलहाल डॉलर के मुकाबले रुपये की यह बढ़त राहत देने वाली है, लेकिन निवेशक अभी भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं।