Indian Rupee Recovery : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये ने करीब 200 दिनों बाद बड़ी वापसी की है। शुक्रवार को रुपया 43 पैसे की जोरदार बढ़त के साथ 93.98 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पहले रुपया 94 के स्तर से नीचे यानी मजबूत स्थिति में 22 अप्रैल 2026 को दिखाई दिया था। बीते सात कारोबारी दिनों में रुपये में करीब 1.31 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और डॉलर में कमजोरी को रुपये की मजबूती की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
94.50 से सीधे 93.98 पर आया रुपया
शुक्रवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 94.50 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान इसने 93.82 का उच्च स्तर और 94.50 का निचला स्तर देखा। अंत में यह 93.98 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पहले गुरुवार को रुपया पांच पैसे मजबूत होकर 94.41 पर बंद हुआ था। लगातार मिल रहे समर्थन से भारतीय मुद्रा की स्थिति में सुधार देखने को मिला है।

200 दिनों बाद लौटी मजबूती
करेंसी बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, रुपया आखिरी बार 22 अप्रैल 2026 को 94 के स्तर से मजबूत होकर 93.80 पर पहुंचा था। इसके बाद डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बना रहा। 28 अक्टूबर को एक डॉलर की कीमत 95.23 रुपये तक पहुंच गई थी। लेकिन पिछले सात कारोबारी दिनों में तस्वीर बदल गई और रुपया करीब 1.31 फीसदी मजबूत हो गया। यह तेजी भारतीय मुद्रा के लिए राहत की खबर है।
शेयर बाजार और विदेशी निवेशकों का साथ
रुपये की मजबूती के साथ शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में भी शानदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 1,718.01 अंक उछलकर 81,028.02 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 493.75 अंक बढ़कर 25,030.35 पर पहुंच गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी बाजार में 13,749.82 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। हालांकि, डॉलर सूचकांक 0.49 फीसदी बढ़कर 102.04 पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव भी 2.04 फीसदी बढ़कर 100.30 डॉलर प्रति बैरल रहा।
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ट्रंप की चुनावी हार और डॉलर पर दबाव
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बाद डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट को भी रुपये के लिए मददगार माना जा रहा है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में पहले आई गिरावट से भारत की आयात लागत कम होने की उम्मीद बनी। विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने भी रुपये को सहारा दिया। हालांकि, अमेरिका के चुनावी नतीजों को रुपये की तेजी की अकेली वजह मानना सही नहीं होगा। वैश्विक बाजार की कई परिस्थितियों का असर मुद्रा की कीमत पर पड़ता है।
क्या 90 तक पहुंच सकता है रुपया?
मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी के मुताबिक, घरेलू बाजार में मजबूती और विदेशी निवेश बढ़ने से रुपये को समर्थन मिल सकता है। उनका अनुमान है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की हाजिर विनिमय दर 93.65 से 94.20 के दायरे में रह सकती है। हालांकि, रूस-यूक्रेन तनाव और पश्चिम एशिया में हमलों से रुपये की तेजी पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में रुपये का 90 तक पहुंचना फिलहाल निश्चित नहीं है। इसके लिए आने वाले दिनों में वैश्विक परिस्थितियों और बाजार के रुख पर नजर रहेगी।