भारतीय रुपये ने शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले मजबूत प्रदर्शन किया। कारोबार के दौरान रुपया 50 पैसे चढ़कर 95.24 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। हाल के दिनों में रुपये में यह सबसे बड़ी मजबूती मानी जा रही है। विदेशी निवेशकों के लिए सरकार और रिजर्व बैंक की ओर से उठाए गए कदमों को इस तेजी की बड़ी वजह माना जा रहा है।
सरकार ने दी बड़ी राहत
सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के लिए सरकारी सिक्योरिटीज से जुड़े नियमों में राहत दी है। अब सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री या उनसे मिलने वाले ब्याज से होने वाली कमाई पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा। इसके लिए अध्यादेश के जरिए कानून में बदलाव किया गया है। इस फैसले से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार और आकर्षक बन सकता है।
आरबीआई के कदमों का असर
रिजर्व बैंक ने भी विदेशी निवेशकों और प्रवासी भारतीयों के लिए कुछ नियमों में ढील दी है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने के लिए पर्याप्त है। इस भरोसेमंद संदेश ने निवेशकों की धारणा को मजबूत किया और रुपये को समर्थन मिला।
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बाजार में क्यों बढ़ा भरोसा?
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि कर राहत और नियामकीय छूट से विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद बनी है। जब निवेशकों का भरोसा बढ़ता है तो डॉलर की मांग अपेक्षाकृत कम होती है और रुपये को मजबूती मिलती है। इसी सकारात्मक माहौल का असर शुक्रवार के कारोबार में साफ दिखाई दिया।
कच्चे तेल और महंगाई पर नजर
हालांकि वैश्विक स्तर पर अभी भी कई अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और उससे महंगाई पर पड़ने वाले असर को देखते हुए रिजर्व बैंक ने लगातार दूसरी बार रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। इससे बाजार को स्थिरता का संकेत मिला है।
आगे क्या रहेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेश में बढ़ोतरी जारी रहती है और वैश्विक हालात ज्यादा खराब नहीं होते, तो रुपये को आगे भी समर्थन मिल सकता है। फिलहाल सरकार और आरबीआई के हालिया फैसलों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है, जिसका सीधा फायदा भारतीय मुद्रा को मिलता दिखाई दे रहा है।