भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक साबित हुआ। कारोबारी दिन की शुरुआत से ही कई मोर्चों पर मजबूती देखने को मिली। एक ओर भारतीय शेयर बाजार में तेज रफ्तार रैली जारी रही, वहीं घरेलू फ्यूचर मार्केट में सोना और चांदी की कीमतें तेजी से ऊपर चढ़ीं। सबसे बड़ी खुशी भारतीय करेंसी मार्केट से आई, जहां रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होता दिखा। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपये की मजबूती का मुख्य कारण है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट। ये दोनों कारक भारतीय बाजारों पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी रुपये में मजबूती का सिलसिला जारी रह सकता है, हालांकि एक दिन पहले ही रुपये में तेज गिरावट दर्ज की गई थी।
रुपए की मजबूत रिकवरी, निवेशकों में भरोसा
पिछले दिन की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए बुधवार सुबह रुपया दो पैसे की मजबूती के साथ 89.20 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, आज के दिन विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार पर भरोसा जताते हुए मजबूत खरीदारी की, जिसका सीधा असर रुपये की चाल पर देखने को मिला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 89.24 प्रति डॉलर पर खुला था, लेकिन थोड़ी देर बाद यह 89.26 पर फिसल गया। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद रुपया संभला और 89.20 के स्तर को छू लिया। इससे पहले मंगलवार को रुपये में छह पैसे की गिरावट देखी गई थी, जब यह 89.20 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार, एफआईआई की वापसी, अमेरिकी डॉलर का दबाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता भारतीय मुद्रा को और राहत दे रही है।
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शेयर बाजार में जबरदस्त रैली, सेंसेक्स-निफ्टी छलांग पर
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त रैली देखने को मिली। दोपहर 12:40 बजे बीएसई सेंसेक्स 884 अंकों की बड़ी छलांग लगाकर 85,471 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में भी 278 अंकों की शानदार बढ़त देखने को मिली और यह 26,163 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, रुपये की मजबूती, विदेशी निवेशकों की बढ़ी हुई दिलचस्पी और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के सुधरने से घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बन गया है। बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भारी खरीदारी देखने को मिल रही है, जिसने बाजार को नई ऊर्जा दी है।
डॉलर इंडेक्स में गिरावट, विदेशी मुद्राओं में हलचल
रुपए की मजबूती के बीच दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति भी कमजोर पाई गई। डॉलर इंडेक्स 0.02% फिसलकर 99.56 पर आ गया, जो दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर का दबाव बढ़ा है। डॉलर की कमजोरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को मजबूत करती है, जिसका फायदा भारतीय रुपये को भी मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता डॉलर पर दबाव बनाए रख सकती है। इस बीच, भारतीय निवेशक भी बाजार की इस सकारात्मक लय से उत्साहित हैं और आने वाले दिनों में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं।