भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की फैक्टशीट में बदलाव की खबर आते ही बाजार में हलचल तेज हो गई। व्हाइट हाउस की ओर से दस्तावेज में संशोधन के बाद निवेशकों की नजर सीधे डॉलर और रुपये की चाल पर टिक गई। बुधवार को कारोबार शुरू होते ही भारतीय रुपया दबाव में दिखा और कमजोर होकर खुला।
डॉलर के मुकाबले छह पैसे टूटा रुपया
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 90.56 पर खुला, लेकिन कुछ ही देर में गिरकर 90.62 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव से करीब छह पैसे की कमजोरी दर्शाता है। हालांकि शुरुआती कारोबार में एक समय रुपया 90.46 तक मजबूत भी हुआ था। मंगलवार को रुपया 10 पैसे चढ़कर 90.56 पर बंद हुआ था, लेकिन नई खबरों ने उसकी रफ्तार रोक दी।
डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल का असर
इस दौरान डॉलर सूचकांक हल्की गिरावट के साथ 96.66 पर रहा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का दाम बढ़कर 69 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत जैसे आयातक देश पर दबाव बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपया कमजोर पड़ सकता है।
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शेयर बाजार में दिखी मजबूती
रुपये में गिरावट के बीच घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। सेंसेक्स 141 अंकों की बढ़त के साथ 84 हजार के ऊपर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी करीब 52 अंकों की तेजी के साथ कारोबार करता दिखा। विदेशी निवेशकों का रुख भी बेहतर रहा। इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 2 अरब डॉलर भारतीय बाजार में लगाए हैं।
आयातकों की डॉलर मांग बनी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये पर दबाव की बड़ी वजह आयातकों की डॉलर खरीद है। साथ ही वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों को सतर्क बनाए हुए हैं। जब भी अंतरराष्ट्रीय हालात अस्थिर होते हैं, डॉलर को सुरक्षित विकल्प माना जाता है और उसकी मांग बढ़ जाती है।
आगे कैसी रहेगी चाल?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि फिलहाल डॉलर-रुपया 90.30 से 90.80 के दायरे में रह सकता है। अगर विदेशी निवेश का प्रवाह बना रहा और डॉलर कमजोर रहा तो रुपये को थोड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक तनाव आगे की दिशा तय करेंगे। फिलहाल बाजार की नजर ट्रेड डील के अगले कदम और अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर टिकी हुई है।