Indian Stock Market Fall : हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए भारी झटके के साथ हुई। पिछले सप्ताह की तेजी सोमवार को बिकवाली के दबाव में कमजोर पड़ गई और कुछ ही घंटों में निवेशकों की करीब 2.34 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट गई। सेंसेक्स 1,000 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 23,000 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया। हैरानी की बात यह रही कि कई बड़े बैंकों के मुनाफे में बढ़ोतरी के बावजूद उनके शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। महंगे कच्चे तेल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी।
बाजार में अचानक क्यों मची बिकवाली
सोमवार दोपहर करीब 1:50 बजे सेंसेक्स 1,000 अंकों से अधिक गिरकर 73,729 के आसपास कारोबार कर रहा था। निफ्टी 50 भी 250 अंकों से ज्यादा टूटकर 22,900 के नीचे चला गया। बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का संकेत इंडिया VIX में आई 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी से मिला, जो 14 के पार पहुंच गया। एनएसई पर 2,474 शेयर गिरावट में रहे, जबकि 894 शेयर बढ़त दर्ज कर सके। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 0.7 फीसदी तक फिसल गए। हालांकि, कारोबार के आखिरी हिस्से में बाजार ने कुछ रिकवरी दिखाई।
बैंकों के नतीजों से क्यों निराश हुए निवेशक
बाजार की गिरावट में निजी बैंकों के शेयरों की अहम भूमिका रही। एक्सिस बैंक का दूसरी तिमाही का स्टैंडअलोन मुनाफा सालाना आधार पर 38 फीसदी बढ़कर 7,003 करोड़ रुपये पहुंच गया, लेकिन यह विश्लेषकों की उम्मीदों से कम रहा। इसके चलते बैंक का शेयर 5 फीसदी से ज्यादा टूट गया। वहीं, एचडीएफसी बैंक का मुनाफा 4.6 फीसदी बढ़कर 19,510 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 18,641 करोड़ रुपये था। बाजार को इससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, जिसके कारण बैंक के शेयर में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। आईसीआईसीआई बैंक और यस बैंक भी दबाव में रहे।
महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें निवेशकों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई हैं। सोमवार को ब्रेंट क्रूड वायदा में 2 फीसदी से अधिक की गिरावट आई, लेकिन कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी रही। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 100 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था। मिडिल ईस्ट में तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं ने पहले ही तेल की कीमतों को ऊपर पहुंचा दिया था। महंगा कच्चा तेल भारत के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है, क्योंकि इससे आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
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विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर
भारतीय बाजार पर वैश्विक कमजोरी का असर भी दिखाई दिया। पिछले शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में नैस्डैक 2 फीसदी से ज्यादा और एसएंडपी 500 एक फीसदी से अधिक गिरा था। सोमवार को जापान का निक्केई भी कमजोर रहा, जबकि इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट 5 फीसदी से अधिक गिर गया। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और पिछले सप्ताह की तेजी के बाद मुनाफावसूली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। अक्टूबर के शुरुआती 11 कारोबारी सत्रों में से नौ में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की थी।
निफ्टी के लिए आगे क्या संकेत
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, आगे की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजे अहम रहेंगे। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार ने महंगे तेल और होर्मुज क्षेत्र में तनाव को बाजार के लिए चुनौती बताया। वहीं, एक्सिस डायरेक्ट के हेमांग गोर के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर महत्वपूर्ण है। तकनीकी रूप से 22,950 पर सपोर्ट और 23,300 पर रेजिस्टेंस बताया गया। हालांकि, बाजार की वास्तविक चाल वैश्विक घटनाक्रम और आने वाले कारोबारी सत्रों पर निर्भर करेगी।