भारतीय कुश्ती के लिए साल 2025 सीनियर स्तर पर कुछ खास नहीं रहा। विश्व चैंपियनशिप में भारत को सिर्फ एक पदक से संतोष करना पड़ा। यह पदक हरियाणा की अंतिम पंघाल ने 53 किलोग्राम वर्ग में कांस्य जीतकर दिलाया। अंतिम पूरे साल निरंतर प्रदर्शन करने वाली इकलौती सीनियर पहलवान रहीं। उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में भी कांस्य जीता और सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक के साथ साल खत्म किया। उनके अलावा अधिकतर सीनियर पहलवान शुरुआती दौर में ही बाहर हो गए, जिससे भारतीय कुश्ती की स्थिति पर सवाल खड़े हुए।
विवाद और प्रतिबंधों की मार
साल 2025 में कुछ बड़े विवाद भी सामने आए। ओलंपिक पदक विजेता अमन सहरावत को विश्व चैंपियनशिप में अधिक वजन के कारण अयोग्य घोषित किया गया और उन पर प्रतिबंध लगाया गया। बाद में बिना शर्त माफी के बाद उनका निलंबन हटा लिया गया। महिला पहलवान नेहा सांगवान को भी अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में वजन ज्यादा होने पर बैन झेलना पड़ा। वहीं रितिका हुड्डा डोपिंग नियमों के उल्लंघन में फंस गईं। इन मामलों से डब्ल्यूएफआई का सख्त रुख तो दिखा, लेकिन भारतीय कुश्ती की छवि को भी नुकसान पहुंचा।
जूनियर पहलवानों ने बढ़ाई उम्मीद
सीनियर स्तर की निराशा के बीच जूनियर पहलवानों ने भारत को बड़ी राहत दी। अंडर-23 और अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। सुजीत कलकल ने अंडर-23 में 65 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतकर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की। महिलाओं में 17 साल की काजल ने 72 किलोग्राम में स्वर्ण पदक जीता, जबकि तपस्या गहलावत ने 57 किलोग्राम वर्ग में पहला स्थान हासिल किया। प्रिया मलिक, सारिका, श्रुति और रीना ने भी पदक जीतकर भारत की पदक तालिका मजबूत की।
भविष्य की ओर नई राह
2025 में विनेश फोगाट की वापसी की घोषणा भी चर्चा में रही। पेरिस ओलंपिक से बाहर होने के बाद उन्होंने फिर से मजबूती से लौटने का संकल्प लिया है। वहीं डब्ल्यूएफआई ने नई चयन नीति लागू की है, जिसमें राष्ट्रीय शिविरों और चयन प्रतियोगिताओं को ज्यादा महत्व दिया गया है। प्रो कुश्ती लीग की वापसी भी युवा पहलवानों के लिए बड़ा मंच बनेगी। सीनियर स्तर पर भले ही साल कठिन रहा हो, लेकिन जूनियर पहलवानों की सफलता ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय कुश्ती का भविष्य अभी भी मजबूत हाथों में है।